सलावा में टेंपो चालक ने जिंदा जलाकर की थी रोहित की हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मुजफ्फरनगर निवासी रोहित कश्यप उर्फ सोनू को जिंदा जलाकर मारने वाले हत्यारोपी नाबालिग की जमानत अदालत ने खारिज कर दी।
थाना सरधना क्षेत्र में आपसी लड़ाई के चलते हत्या कर शव को जलाने के आरोप में न्यायालय विशेष न्यायाधीश पोक्सो अधिनियम ने आरोपी नाबालिग की जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
अभियोजन अधिकारी नरेंद्र चौहान ने न्यायालय को बताया कि थाना सरधना पर गांव ज्वालागढ़ के रहने वाली मदनवती ने छह जनवरी 2026 को मुकदमा दर्ज कराया था कि उसका भांजा रोहित उर्फ सोनू उनसे मिलने आ रहा था। वह मुजफ्फरनगर से दादरी आया। वहां से वह ज्वालागढ़ आने के लिए आरोपी के टेंपो में सवार हुआ था। उसने फोन पर उसने बताया कि मुझे सलावा गांव के कुछ लड़के पीट रहे हैं, फिर दूसरी बार फोन कर बताया कि उसे ज्वालागढ़ लेकर जा रहे हैं। रोहित को पूरी रात ढूंढ़ा गया परंतु नहीं मिला।
अगली सुबह पता चला कि अक्खेपुर गांव के पास किसान पब्लिक स्कूल के पास उसका जला हुआ शव मिला। पुलिस ने विवेचना करते हुए थाना सरधना के गांव सलावा के रहने वाले नाबालिग को आरोपी बताते हुए गिरफ्तार किया, जिसकी किशोर बोर्ड ने उम्र 16 वर्ष 7 महीने नियत की थी। न्यायालय ने जमानत प्रार्थना पत्र की सुनवाई करते हुए आदेश पारित किया कि घटना को देखते हुए आरोपी फिर से अपराध में शामिल हो सकता है। जिस पर कठोर नियंत्रण की आवश्यकता है। यदि उसे जमानत दी गई तो उस पर नियंत्रण का अभाव हो जाएगा। न्यायालय ने आरोपी की जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दी।
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हत्या के आरोप में आरोपी बरी
मेरठ। किशोर के साथ यौन हिंसा कर हत्या करने के आरोप में आरोपी को निर्दोष पाते हुए न्यायालय अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट पोक्सो मोहम्मद बाबर खान ने बरी कर दिया। घटना 21 अगस्त 2017 को घटी थी।
आरोपी पक्ष ने न्यायालय को अवगत कराया कि एक घटना में थाना कंकरखेड़ा के गांव पावली खास के रहने वाले रफीक के पुत्र मोहम्मद अहमद उर्फ छुटकी के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई थी कि 21 अगस्त 2017 को एक नाबालिग बच्चे के साथ आरोपी ने यौन हिंसा कर उसकी हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में न्यायालय में मृतक के पिता सहित 9 गवाह पेश किए थे।
वहीं, आरोपी पक्ष की ओर से इन गवाहों से न्यायालय में सवाल पूछे गए जिसमें गवाहों ने घटना में आरोपी मोहम्मद अहमद के शामिल होने की सत्यता पर स्पष्ट गवाही नहीं दी। न्यायालय ने आरोपी एवं पीड़ित पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के पश्चात निर्णय दिया कि घटना अज्ञात के विरुद्ध दर्ज कराई गई थी। किसी गवाह ने यह नहीं पाया कि अंतिम समय में आरोपी मृतक के साथ था। उन्होंने अभियोजन के पुलिस विवेचना में घटना किए जाने के आरोपी के बयानों पर संशय पैदा किया। मृतक के पास से कोई भी साक्ष्य ऐसा प्राप्त नहीं हुआ जिससे कि आरोपी को दोषी माना जा सके। शुक्रवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोष मुक्त कर दिया।
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