दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रफीक अंसारी की हनक के आगे जेल मैनुअल बौना हो गया। इसकी बानगी बृहस्पतिवार को देखने को मिली। जिला जेल में बंदियों से मिलने को उनके परिजन घंटों लाइन में खड़े होते होंगे। वहीं, नियमों को ताक पर रखकर राज्यमंत्री का लेटरपैड देखकर बंदियों से उनके परिजनों की सीधी मुलाकात कराई जा रही है।
जिला जेल में आबिद, साबिर और जाहिद काफी दिनों से बंद है। उनसे मुलाकात करने के लिए दोपहर करीब दो बजेे हुसैन और आबिद नाम के व्यक्ति जेल के गेट पर पहुंचे। गेट पर तैनात सिपाही को उन्होंने दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रफीक अंसारी का लेटरपैड दिखाया। इसमें बिना लागलपेट के स्पष्ट लिखा था कि इनको मिलवाएं। सिपाही ने लेटरपैड देखते ही दोनों की जेल में एंट्री कर ली। राज्यमंत्री के लेटरपैड के आगे जेल मैन्युअल कमजोर पड़ गया।
जेल में जाना तो मंत्री से मिलो
जेल में सीधी मुलाकात करनी है तो दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री से मिलो। राज्यमंत्री के लेटरपैड का मजमून देखकर तो ऐसा ही लगता है। इसमें बस केवल पैन से यह लिखने की देर है कि किसको किससे मिलना है। बाकी सब छपा-छपाया है। साफ जाहिर है कि ऐसे लेटरपैड से रोजाना बंदियों से सीधी मुलाकात होती होगी।
और क्यों करते हैं लंबा इंतजार
इस तरह की सिफारिश को छोड़ दें तो जेल मैनुअल के अनुसार किसी बंदी से मिलने के लिए नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके लिए दिन और समय निर्धारित हैं। बंदियों से मुलाकात करने के लिये उनके परिजनों को लंबी लाइन में लगना पड़ता है। पर्ची बनती है और फिर नाम की बोली लगती है। तमाम नियम पूरे करने के बाद परिजनों को उनके बंदियों से मुलाकात कराई जाती है। सवाल यह है कि एक तरफ तो लोगों की लंबे इंतजार के बाद बंदियों से मुलाकात होती तो दूसरी तरफ मंत्री का लेटरपैड देखते ही जेल में सीधी एंट्री हो जाती है।
कोट
समस्या सुनने का काम है हमारा। दो लोग आए थे, जिनको हमने अपने लेटरपैड पर लिखकर दिया कि तुम जेल में अपने बंदियों से मुलाकात कर लो। वो लोग कौन थे। बंदी किस मामले में जेल में बंद है। इसकी कोई जानकारी हमें नहीं है।- रफीक अंसारी, सलाहकार पर्यटन विभाग (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री)
राज्यमंत्री रफीक अंसारी का कोई लेटरपैड मुझे नहीं मिला। अगर परिजनों कोे बंदी से मुलाकात करनी होती है तो वह प्रार्थना पत्र देकर भी मिल सकता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसी नेता का लेटरपैड देखकर सीधी मुलाकात हो जाए। एसएचएम रिजवी, वरिष्ठ जेल अधीक्षक