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किसानों की मेहनत का असर, मीठे गन्ने ने चीनी से भरी मिलों की झोली

Fri, 06 Jan 2017 11:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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किसानों और गन्ना विभाग की मेहनत से मीठे हुए गन्ने ने शुगर मिलों की झोली बंपर चीनी उत्पादन से भर दी है। शुगर इंडस्ट्री कम लागत में चीनी का अधिक उत्पादन होने और रेट महंगा होने के बाद भी गन्ना किसानों को देय गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर रही है। मंडल की शुगर मिलों ने अभी तक देय भुगतान के सापेक्ष 40 फीसदी गन्ना मूल्य का भुगतान किया है।
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मंडल में अगेती और सामान्य गन्ना प्रजाति का आदर्श बुआई मानक (60:40) बिगड़ने पर गन्ने में चीनी का परता कम हो गया था। इसके चलते शुगर मिलें अधिक लागत में कम चीनी उत्पादन और कीमत कम होने की बात कहकर घाटे का रोना रोती थी। लेकिन इस बार गन्ना विभाग और किसानों की मेहनत के बूते मंडल में चीनी से भरपूर अगेती प्रजाति गन्ने की बुआई में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। इसका परिणाम इस साल देखने को मिल रहा है। अब तक मंडल के चीनी मिलों की औसत चीनी रिकवरी 9.37 फीसदी चल रही है। एक कुंतल गन्ने में 9.37 किलो चीनी मिल रही है। चीनी का हॉलसेल रेट भी औसतन 3500 से 3600 रुपये प्रति कुंतल चल रहा है। इससे मिलों के वारे न्यारे हो रहे हैं। मवाना, दौराला, सकौती, नंगलामल, सिंभावली और अनामिका मिलों में तो चीनी की रिकवरी 10 फीसदी से ऊपर आ रही है।

42.31 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन
गन्ना विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक गत 3 जनवरी तक मंडल की शुगर मिलों ने 472.31 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन कर लिया है। औसत मूल्य 3500 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से यह चीनी 1500 करोड़ रुपये से अधिक की बैठती है। यह उत्पादन शुगर इंडस्ट्री ने 1385 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदकर किया है।
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40 फीसदी किया भुगतान
मंडल की शुगर मिलों ने किसानों का करीब 1385 करोड़ रुपये देय है। लेकिन मिलों ने 421 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। मिलों पर 964 करोड़ रुपये बकाया है। देय मूल्य भुगतान के सापेक्ष इंडस्ट्री ने केवल 40 फीसदी गन्ना मूल्य का ही भुगतान किया है। हालांकि दौराला, सकौती, अनामिका, साबितगढ़, मोहिउद्दीनपुर और सहकारी शुगर मिलों ने भुगतान में राहत दी है।

बोलते आंकड़े
मंडल में पेराई कर रही मिलें                            15
कुल गन्ना खरीद                                   451 लाख कुंतल
चीनी उत्पादन                                     42.31 लाख कुंतल
देय गन्ना मूल्य                                       1385 करोड़
भुगतान                                                421 करोड़
बकाया गन्ना मूल्य                                    964 करोड़
उत्पादित चीनी की औसत कीमत                 करीब 1502 करोड़
(चीनी की दर 3550 रुपये प्रति कुंतल ली गई है)

क्या कहते हैं किसान नेता
मिलें दबा रही भुगतान
इस सीजन में चीनी की रिकवरी भी ज्यादा आ रही है और रेट भी महंगा है। लेकिन मिलों को किसानों का पैसा दबाने की आदत हो गई है। संगठित नहीं होने से किसान परेशान हैं।  -चौधरी राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू

बेखौफ है शुगर इंडस्ट्री
सरकार की हीलाहवाली से शुगर इंडस्ट्री बेखौफ हो गई है। किसी भी मिल को घाटा नहीं है। चीनी के अलावा भी गन्ने से अनेक उत्पाद तैयार करके मिले मुनाफा कमाती है। -सरदार वीएम सिंह, राष्ट्रीय संयोजक राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन

मिलें हो रहीं मालामाल
चीनी का परता अधिक आने से मिलें मालामाल हो रही है, लेकिन किसानों का बकाया भुगतान नहीं कर रही। सरकार की उदासीनता और किसानों के असंगठित होने का फायदा मिलों को मिल रहा है। किसान हक के लिए आंदोलन करने के लिए तैयार खड़ा है। -डॉ. राजकुमार सांगवान, संगठन प्रभारी वेस्ट यूपी रालोद

क्या कहते हैं अधिकारी
इस सीजन में चीनी की रिकवरी अच्छी आ रही है। शुगर मिलों को टैगिंग आदेश का पालन करते हुए किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान के लिए लगातार कहा जा रहा है। जो भी मिल उल्लंघन करेगी उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र
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