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Meerut News: कंकरीट में बदले मेरठ में जंगल, फिर भी बढ़ा गन्ना, गेहूं, तिलहन का रकबा

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राजकुमार सैनी
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मेरठ। जहां एक ओर मेरठ में एक्सप्रेसवे के जाल और टाउनशिप के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग के आंकड़े किसानों द्वारा फसल विविधीकरण अपनाने की ओर इशारा कर रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। जंगल के कंकरीट में तब्दील होने, भूमि अधिग्रहण और शहरीकरण के दौर में यह महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में स्थित मेरठ की कृषि भूमि को अत्यंत उपजाऊ माना जाता है। यह हर प्रकार की फसल के लिए उपयुक्त है। पारंपरिक रूप से मेरठ और आसपास के जनपदों में गन्ने की खेती प्रमुख रही है। इसमें किसानों को अपेक्षाकृत कम मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि गेहूं, चना, मटर और सरसों जैसी फसलों में बुवाई के बाद निराई-गुड़ाई आदि में अधिक श्रम की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में गेहूं के रकबे में 5,699 हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। चने के रकबे में 157 हेक्टेयर, मसूर में 689 हेक्टेयर और सरसों के रकबे में 8,720 हेक्टेयर की उल्लेखनीय बढ़त हुई है। केवल मटर की फसल के रकबे में गिरावट आई है।
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मेरठ जिले में विभिन्न फसलों का रकबा

गेहूं: वर्ष 2024-25 में 66,221 हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 71,920 हेक्टेयर हुआ।
चना: वर्ष 2024-25 में 15 हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 172 हेक्टेयर हुआ।
मटर: वर्ष 2024-25 में 468 हेक्टेयर से घटकर 2025-26 में 251 हेक्टेयर रह गया।
मसूर: वर्ष 2024-25 में 651 हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 1,340 हेक्टेयर हुआ।
सरसों: वर्ष 2024-25 में 2,956 हेक्टेयर से बढ़कर 2025-26 में 8,720 हेक्टेयर हुआ।

नोट - यह आंकड़े कृषि विभाग द्वारा जारी किए गए हैं।
उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने बताया कि रबी, खरीफ और जायद मौसम में फसलों का स्थलीय सत्यापन और डिजिटल सर्वे के माध्यम से रकबे की वास्तविक जांच की जाती है। किसान फसल चक्र अपना रहे हैं और खेती की जमीन की जोत छोटी होने के कारण वे गन्ने की खेती का रकबा कम करके गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।
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गन्ने के रकबे में स्थिरता का दावा
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. बीके पटेल का कहना है कि जिले में गन्ने का रकबा कम नहीं हो रहा है। पिछले दो-तीन वर्षों से यह लगभग 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर पर स्थिर बना हुआ है। उनका मानना है कि भूमि की जोत छोटी होने के बावजूद किसान अभी भी गन्ना उगाना पसंद कर रहे हैं। अन्य फसलों का रकबा बढ़ा है लेकिन गन्ने की खेती अभी भी क्षेत्र में महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह विरोधाभास किसानों की बदलती रणनीतियों और भूमि उपयोग के जटिल परिदृश्य को दर्शाता है।
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