दूध निकालते ही सड़कों पर छोड़ देते हैं
शहर की डेयरियों में पल रहे पशुओं को सुबह के समय दूध निकालने के बाद सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। यह दिनभर सड़कों पर घूमते रहते हैं जिससे सड़क दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रहता है। पूर्व में पशुओं के कारण कई बड़ी दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसके अलावा आवारा पशुओं के कारण शहर की सड़कों पर जाम की समस्या भी बनती है।
फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था की गई है
गोवंश को पकड़ने, चारा, पानी की व्यवस्था कर ली गई है। सड़क पर मिलने वाले गोवंश के मालिक से दस हजार रुपये प्रति पशु जुर्माना वसूला जाएगा। फिलहाल तीन स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था की है। स्थाई व्यवस्था परतापुर के बराल में की जा रही है।
- मनोज कुमार चौहान, नगर आयुक्त
यहां रखे जाएंगे गोवंश
- सूरजकुंड पर कांजी हाउस
- सूरजकुंड वाहन डिपो और महापौर कार्यालय के बीच निगम की चार दीवारी के बीच
- अछरोंडा में
एक प्राइवेट संस्थान की चार दीवारी में
गांवों में बेसहारा गोवंश को पकड़ेंगे ग्राम प्रधान
देहात में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले और गली मोहल्लों में बेसहारा घूमने वाले गोवंश को पकड़कर आश्रय स्थल तक पहुंचाने, भरणपोषण की व्यवस्था ग्राम प्रधानों को करनी होगी। इसके लिए सीडीओ आर्यका अखौरी ने सभी ग्राम प्रधानों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
साथ ही पशुपालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने पशुओं को घर या घेर में ही बांधकर रखें। पूरे प्रदेश में बेसहारा गोवंश की सुरक्षा और उनको उचित स्थान पर रखकर चारे आदि की व्यवस्था कराने के लिए अभियान शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री ने दस जनवरी तक का समय दिया हुआ है। अब एक दिन शेष है। तो सभी अधिकारी हरकत में आ गए हैं। जहां नगर निगम प्रशासन ने शहर की सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश को पकड़ने और उनके रखने की व्यवस्था कर दी है।
वहीं देहात के गांवों में बेसहारा घूमने वाले गोवंश को पकड़ने, उनको आश्रय स्थल तक पहुंचाने और चारे आदि की सुविधा की जिम्मेदारी सभी ग्राम प्रधानों को सौंपी गयी है। ग्राम प्रधानों को अपने अपने गांव में मुनादी कराकर संदेश देना होगा कि कोई पशुपालन गोवंश को बेसहारा नहीं छोड़ेगा। अपने पशुओं को अपने घेर में ही बांधकर रखेंगे।
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