जब पीएम या सीएम का दौरा होता है, तो मेरठ कार्यालय को आसपास के जिलों से कार उधार मांगनी पड़ती है। यानी माननीयों की सुविधा जस की तस, लेकिन रोडवेज का पेट लगातार खाली। केंद्र सरकार, यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली सबके माननीयों ने इन कारों में बैठकर सत्ता के सफर तय किए। चुनाव आए तो गाड़ियां हाजिर, प्रोटोकॉल लगा तो कारें तैयार, मंत्रियों का दौरा हुआ तो सालों-साल गाड़ियां तैनात।
n पुलिस विभाग सबसे बड़ा चार करोड़ा का कर्जदार : वर्ष 1980 से 2025 तक का हिसाब जोड़ा जाए, तो मेरठ परिवहन निगम के खाते में सवा आठ करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया खड़ा है। सबसे आगे है यूपी पुलिस विभाग, जिस पर करीब पौने चार करोड़ रुपये बकाया हैं। यानी जो कानून व्यवस्था संभालता है, वही भुगतान व्यवस्था में सबसे आगे नहीं दिखता। पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव, निकाय चुनाव हर चुनाव में वीआईपी कारें दौड़ीं, लेकिन भुगतान अक्सर अगली फाइल में चला गया।
बड़ा बकाया और बकाएदार
यूपी पुलिस विभाग करीब पौन चार करोड़
यूपी के विधान परिषद चुनाव 22 करीब साढ़े दस लाख
पंचायत चुनाव 2021 एक करोड़ 68 लाख
विधानसभा चुनाव 2022 करीब सात लाख
उप्र निकाय चुनाव 10706080
उप्र विधान सभा उपचुनाव 2024 करीब पांच लाख
प्रोटोकॉल करीब चार लाख
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग करीब 55 हजार
एससी-एसटी आयोग करीब 48 हजार
राज्य संपत्ति विभाग करीब 55 हजार
उप्र महिला कल्याण निगम करीब 23 हजार
राज्य महिला आयोग करीब 70 लाख
श्रीटोन इंडिया लि. करीब सवा लाख
टैबलेट, स्मार्ट फोन वितरण किराया करीब सवा लाख
माननीयों को उपलब्ध कराई गईं कारों का पिछला बकाया अधिक चल रहा है। इस समय अधिकतर विभाग समय पर भुगतान कर रहे हैं। बकाया वसूली के लिए संबंधित विभागों से लगातार पत्राचार चलता है। अब परिवहन निगम के मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय पर केवल दो ही वीआईपी कार रह गई हैं। - संदीप नायक, आरएम, मेरठ।