कितनी मिन्नतों के बाद आशीष के पापा उसे एक बाइक दिलाने को राजी हुए थे। ....कितनी मेहनत के बाद चौधरी साहब ने गाड़ी खरीदी थी और सरदार जी की पुरानी स्कूटी उनकी लाडली थी जिसके सहारे वे शहर के दूसरे कोने पर बसे अपने दोस्त इमरान का हाल-चाल ले आते थे, लेकिन शुक्रवार का वो मनहूस दिन आया और कड़ी मेहनत, खून-पसीने की कमाई से खरीदे गए ये वाहन बवाल की आग में जलकर राख हो गए। आगे तस्वीरों में देखें आखिर कैसे हिंसा के दौरान देखते ही देखते जला दिए गए कितने ही वाहन :-