मेरठ मेडिकल कॉलेज के वार्ड का हाल
- फोटो : अमर उजाला
कितने टॉयलेट हैं?
- चार-पांच ही हैं। फिर भी सफाई नहीं है। आपने फोन करा तो या तो इसकी वजह से या फिर और थोड़ी सफाई हो गई।
कोई खाने की व्यवस्था?
- कोई टाइम नहीं है खाने का, कल 11 बजे तो नाश्ता आया। किसी ने दवाई खानी है तो वो कुछ नहीं कर सकता। कोई डॉक्टर अंदर नहीं आता।
दवाई क्या दे रहे हैं यहां पर?
- मैं कह रहा हूं कोई गोली ही नहीं आ रही। या तो कोई ताकत की दे देवें या किसी को पैरासिटामोल ही दे देवें। कोई दवाई नहीं आ रही। और कहने को कह रहे हैं कि बहुत अच्छा इलाज हो रहा मेडिकल में।
- कुछ नहीं है, बस एक ही काम इनका कि बस पानी टाइम से मिल जाता है, और कुछ नहीं।
इसका मतलब यहां पर मार रहे हैं और?
बस, बीमारी किसी को यह नहीं पता किसी को कोरोना है या नहीं है। कल एक बेचारा आया, उसने यहां शीशे तोड़ने की कोशिश कर दी। मैं तो यहीं तोड़कर नीचे कूद जाऊंगा। मेरे को जब कोई दिक्कत नहीं है, मैं सिर का इलाज कराने आया और मुझे करोना वार्ड के अंदर भेज दिया। ऊपर वाला न करे, अगर मुझे कोरोना हो गया तो मेरे बच्चों का क्या होगा। एक घंटे तक वो बेचारा परेशान रहा, कोई सुनने वाला नहीं था।
पहले भी लगे आरोप
इससे पहले भी मेडिकल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। 10 से ज्यादा कोरोना संदिग्ध मरीज यहां से भाग गए थे। हालांकि बाद में उन्हें पुलिस ट्रेस कर वापस बुला लिया था।
बेहतर दे रहे इलाज
मेडिकल में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है। यहां से कोरोना के 40 से ज्यादा मरीज ठीक होकर जा चुके हैं। जो शिकायतें मिली हैं उनका निस्तारण कराया जा रहा है।
- डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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