कोरोना संक्रमित महिला का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी में एक पिता के लिए इससे ज्यादा बेबसी और क्या होगी कि जिस बेटी को गोद में खिलाया था, अंतिम संस्कार के समय उसे देख और छू भी नहीं सका।
मामला कोरोना संक्रमित 17 वर्षीय युवती से जुड़ा है, जिसका तमाम दुश्वारियों के बाद तीन दिन बाद अंतिम संस्कार हो पाया। ट्रांसलेम एकेडमी में क्वारंटीन पिता ने बताया कि वह एक दो साल बाद बेटी के हाथ पीले करने की सोच रहे थे। लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था। अचानक से बेटी की तबीयत बिगड़ी तो उसे लेकर मेरठ मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। पता चला कि उसे कोरोना है।
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इसके बाद बेटी भर्ती की गई तो पूरा परिवार क्वारंटीन हो गया। तीन जून को किशोरी की मौत हो गई। लेकिन तीन दिन तक शव मोर्चरी में रखा रहा। पूर्व विधायक अमित अग्रवाल ने डीएम तक मामला पहुंचाया तो पिता को क्वारंटीन सेंटर से लाकर बेटी के शव के साथ सूरजकुंड श्मशान घाट भेजा गया।
मेडिकल प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग के अनुसार हमने संपर्क किया था। लेकिन इनके परिजन क्वारंटीन थे, जिस कारण शव सुपुर्द करने में देर हुई।
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