मकसद तो योग था
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश के 40 जिलों में योग वेलनेस सेंटर शुरू किए जाने थे, जिनमें से अधिकांश में यह केंद्र खोले जा चुके हैं। इनकी स्थापना के लिए केंद्र सरकार ने 2.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह सेंटर अस्पताल की ओपीडी के समय संचालित किए जाते हैं।
शुरुआती सामान के लिए एकमुश्त 60 हजार जबकि श्रम शक्ति व रखरखाव के लिए हर साल 5.35 लाख रुपये दिए जाने थे। इन केंद्रों के संचालन के लिए गठित समिति में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी और जिला होम्योपैथिक अधिकारी सदस्य सचिव बनाए गए थे। योग प्रशिक्षक को 27-35 हजार रुपये और सहायक को 10 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाना था।
यह थी योग्यता
योग प्रशिक्षक के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से योग में पूर्णकालिक रेगुलर डिग्री, योग में एमए या एमएससी के साथ किसी प्रतिष्ठित योग थेरेपी सेंटर या चिकित्सालय में कम से कम एक साल का अनुभव और यौगिक क्रियाओं के प्रदर्शन में व्यावहारिक दक्षता जरूरी थी। इसी तरह योग सहायक के लिए कक्षा 10 उत्तीर्ण करने के साथ ही एक साल का अनुभव जरूरी था।
पुराना ठप, नया खोलने की तैयारी
योग शिक्षक और सहायक का अनुबंध बढ़ाने और वेतन दिए जाने के लिए कई बार शासन को पत्र भेजे मगर सुनवाई नहीं हुई। यह भी समझ से परे है कि जो सेंटर अच्छा चल रहा था, वह ठप कर दिया गया है और शासन कैंट क्षेत्र में नया योगा वेलनेस सेंटर खोलने की तैयारी कर रहा है।
-डॉ. पूनम गुप्ता, जिला होम्यो मेडिकल ऑफिसर
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