केंद्र सरकार ने संसद में तीन तलाक कानून लाकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिया है, जिसे लेकर उलमाओं ने अपनी-अपनी राय दी हैं। उलमा एकमुश्त (एक बार में) तीन तलाक को शरीयत के लिहाज से सही नहीं मान रहे हैं। शिया धर्म गुरु पूरी तरह एकमुश्त तीन तलाक के पक्ष में नहीं हैं, जबकि सुन्नी उलमाओं के अनुसार भी एकमुश्त तीन तलाक ठीक नहीं है। वह कहते हैं कि शरीयत में भी तीन महीने में तलाक देने का प्रावधान है। सिर्फ विशेष परिस्थितियों में एक बार में तीन तलाक देना बताया गया है। जबकि मुस्लिम समाज के कुछ लोग गुस्से में आकर एक बार में तीन तलाक देकर रिश्ते को समाप्त कर देते हैं। इससे बचने के लिए उलमाओं ने मामले में अपना पक्ष रखा है।
मनसबिया प्रधानाचार्य सैयद मौलाना अफजाल नकवी ने बताया कि शिया धर्म में तलाक को लेकर बेहद कडे़ मसले दिए गए हैं। शिया धर्म में निकाह के समय गवाह और वकील होते हैं। जिनके बिना निकाह नहीं हो सकता है। शिया धर्म में तीन महीने के समय में तीन तलाक का प्रावधान है। जबकि तलाक के समय दो गवाहों का होना जरूरी है। अगर तलाक के समय दो गवाह मौके पर नहीं हैं, तो तलाक नहीं होगा।