पुरानी विद्युत फर्नेस को भी सही कर उसे भी गैस संचालित किया जाएगा। ऐसे में शवदाह गृह में एक दिन में 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार हो सकेगा। अब फरीदाबाद की कंपनी सिविल वर्क के लिए भी कोटेशन देगी। गाजियाबाद या फरीदाबाद की किसी एक कंपनी को बुधवार को फाइनल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही बुधवार से शवदाह गृह सफाई के साथ अन्य कार्य शुरू हो जाएंगे।
ऐसे संचालित होता है गैस संचालित शवदाह गृह
ओम साईं कंपनी के अधिकारी गौरव ने बताया कि नई तकनीक से बने शवदाह गृह में एक शव जाने पर 40 मिनट में अंतिम संस्कार के बाद फूल बाहर आ जाते हैं। इसमें गैस संचालित फर्नेस लगाई जाती है। सूरजकुंड के मुख्य द्वार तक गैस की पाइपलाइन है, जिसे शवदाह गृह तक बिछाना होगा। इसमें एलोब्रिक एक स्थान होता है, जिसमें शव जाता है।
आईसी फैन चिमनी से कनेक्ट होता है जो धुएं को खींच लेता है। इसके साथ स्क्रबर भी लगाया जाता है। यह काले धुंए को पानी की मदद से शुद्ध कर देता है। चिमनी भी इस तरह लगाई जाती है कि धुएं से आसपास के लोगों को नुकसान न पहुंचे। वाटर टैंक से ही गुजरकर धुएं में मौजूद कण शुद्ध हो जाते हैं। पैनल और बर्नर एक हजार डिग्री से अधिक का तापमान भट्टी में बनाते हैं।