इसके बाद सूचना पर पहुंचे रेलवे विभाग के अधिकारियों ने मशक्कत कर इंजन में फंसे गोवंश को निकलवाया और पास ही मिट्टी में दबाया गया। इस दौरान करीब डेढ़ घंटा ट्रैक पर रेलयातायात बाधित रहा, जबकि दूसरे ट्रैक पर यातायात सुचारू चलता रहा। अगर चालक ब्रेक न मारता तो रेलवे ट्रेक पर बड़ा हादसा हो सकता था। जंगल में ट्रेन रुकने से यात्रियों की भी सांसे अटक गई।
धीमी थी ट्रेन, तेज होती तो हो जाता हादसा
मोदीपुरम में दौराला रेलवे स्टेशन से ट्रेन चली थी। जब तक ट्रेन ने रफ्तार नहीं पकड़ी थी। दौराला के बाद मटौर भी रेलवे फाटक था, धीमे धीमे ट्रेन रफ्तार पकड़ रही थी, तभी सामने गायों का झुंड आ गया और चालक ने ब्रेक ले लिए, ट्रेन अगर तेज होती और ब्रेक लगते तो ट्रेन पलट भी सकती थी, रफ्तार धीमी होने के कारण हादसा होने से बच गया।
गांवों में बढ़ रहे हैं आवारा पशु
गांवों में आवारा पशु बढ़ते जा रहे हैं। हालात यह हो रहे हैं कि गांवों में पशुओं का झुंड का झुंड आ जाता है। बुधवार को भी पशुओं के झुंड के कारण रेल हादसा होते-होते बचा। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार यह पशु ट्रैक पर पहुंच चुके हैं।
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