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मेरठ: प्लान करे काम तो हो जाम का काम तमाम, जिधर देखो उधर ही लोग हो रहे परेशान

Thu, 03 Jan 2019 12:50 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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traffic jam - फोटो : अमर उजाला
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जाम के कारण बद से बदतर होते जा रहे मेरठ महानगर के ट्रैफिक सिस्टम को यदि दुरुस्त करना है तो सीआरआरआई के प्लान के अनुसार ही काम करना होगा। इस प्लान में स्पष्ट है कि यहां के चौराहों पर शार्ट टर्म प्लानिंग से काम चलने वाला नहीं। खास तौर पर एचआरएस चौक का एकमात्र विकल्प फ्लाईओवर ही है।
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मेरठ शहर के ट्रैफिक सिस्टम पर कई बार सर्वे हो चुका है। खास बात यह है कि कुछ दिन के निजात दिलाने वाले प्लान बनाए और उन पर काम भी हुआ। लेकिन यह पैसा बरबाद ही गया। पहले चरण में शहर के चार चौराहों पर शार्ट टर्म इम्प्रूवमेंट का प्लान (दस साल के लिए) बनाकर भेजा था। हापुड़ अड्डा चौराहा, बेगमपुल चौराहे, तेजगढ़ी तथा एचआरएस चौक इसमें शामिल किए गए थे। इन सभी स्थानों पर काम हुआ और लगभग छह करोड़ रुपये खर्च हुए। लेकिन यह रकम बेकार ही गई। इन चौराहों पर आज भी जाम लगा रहता है।

यहां स्थायी समाधान की जरूरत है। यातायात पुलिस ने इस बाबत सीआरआरआई (सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट) की टीम से वार्ता की। जहां से कहा गया है कि मेरठ के लिए अब लांग टर्म प्लान चाहिए। इसके लिए कई चौराहों पर फ्लाईओवर की आवश्यकता है। इस पर एमडीए, ट्रैफिक तथा निगम आदि विभागों की ज्वाइंट टीम भी मंथन कर रही है। यदि पूरे शहर का विस्तृत प्लान चाहिए तो डीपीआर पर नए सिरे से काम करना होगा। फिलहाल प्राथमिक रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है।
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एचआरएस तिराहा का एकमात्र विकल्प
दिल्ली रोड स्थित एचआरएस चौराहे पर टीम ने सुझाया है कि यहां सबसे विकट स्थिति है। इस तिराहे पर दिल्ली रोड से बागपत मार्ग और बागपत मार्ग से दिल्ली रोड की तरफ टर्न लेने वाले ट्रैफिक के आपस में टकराने की स्थिति उत्पन्न होती है। यहां जाम की स्थिति रहती है। सुबह सात बजे से शाम नौ बजे तक इस चौराहे पर प्रतिदिन सत्तर से अस्सी हजार वाहन गुजरते हैं। यह संख्या वीकेंड पर बढ़ जाती है।

बढ़ रहा ट्रैफिक का लोड
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की रिपोर्ट के हवाले एवं पीडीपीटी सर्वे से रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक महानगर की जनसंख्या 34 लाख के पार है। वर्ष 2021 में यह जनसंख्या 45 लाख को पार कर जाएगी। ऐसे में जहां सही आवासीय एवं योजना को विस्तार देना होगा तो वहीं इसी के मुताबिक ट्रैफिक प्लान भी करना होगा। मेरठ के चौराहे कई गुना भार अभी झेल रहे हैं। दिल्ली रोड पर ही प्रतिदिन चार से पांच लाख लोग सफर कर रहे हैं। यहां 93 प्रतिशत सड़कों पर फुटपाथ नहीं है। 

हापुड़ अड्डा चौराहा
फ्लाई ओवर ही बने। चौतरफा ट्रैफिक की मॉनीटरिंग कर यू टर्न आदि डेवलेप किए जाएं।  चारों ओर सड़क चौड़ी की जाएं। पूर्व में बने फुटपाथ को भी हटाया जाए।

रेलवे रोड चौराहा
जैन नगर से निकलने वाले बाईपास पर काम हो। अवैध निर्माण हटाकर रोड का चौड़ीकरण, टर्निंग पर आ रहे पोल, टेलीफोन, पेड़, बॉक्स को यातायात व्यवस्था के लिए हटाना बहुत जरूरी है।

बेगमपुल
यहां तो फ्लाई ओवर का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।  सात सौ मीटर लंबा फ्लाई ओवर बनाने का प्लान है। यह निर्माण लगभग 110 करोड़ में होगा। इसमें साठ करोड़ रुपये एमडीए और 50 करोड़ रुपये निगम को जुटाने की बात कही गई थी।

इन पर भी हो काम
ईव्ज चौराहा
बच्चा पार्क
एल ब्लॉक
तेजगढ़ी चौराहा
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पांच मिनट जाम लगा तो कंट्रोल रूम में होगा दर्ज 
शहर की प्रमुख सड़कों पर लगने वाला जाम अब कंट्रोल रूम में दर्ज होगा। हर रोज इसकी समीक्षा की जाएगी और जाम के कारणों पर चर्चा कर उनके निराकरण का प्रयास होगा। अभी तक यह जाम कंट्रोल रूम में दर्ज नहीं हो पा रहा था।
बुधवार को एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी ने जाम की समस्या का हल निकालने के उद्देश्य से ऐसे मार्गों का सर्वे किया, जहां ज्यादा जाम लगता है। उन्होंने परतापुर तिराहा बाईपास के यू टर्न पर इंटरचेंज को लेकर लग रहे जाम को लेकर भी निर्देश दिए। एसपी ट्रैफिक के अनुसार जाम के कारणों को जानने का प्रयास किया गया है। बिग बाइट कट, परतापुर बाईपास सहित करीब आधा दर्जन स्थान चिह्नित किए हैं। इनको लेकर प्लान तैयार किया जाएगा। ताकि जाम से निजात मिल सके। एनएचएआई को भी पत्र लिखा गया है। 

बस अड्डे बाहर हों
संयुक्त कमेटी और सीआरआरआई दोनों ही की रिपोर्ट कह रही है कि  रोडवेज बस अड्डे शहर से बाहर होने चाहिएं। दिल्ली रोड पर स्थित भैसाली बस अड्डा जाम का बड़ा कारण बन रहा है। यहां से चल रही बसें, यहां पहुंचने केलिए जा रहे यात्री, उनके वाहन पूरे दिल्ली रोड पर जाम लगा रहे हैं।

रिपोर्ट का अध्ययन कर करेंगे बात
हम रिपोर्ट भेज चुके हैं कि रोडवेज बस अड्डे बाहर होने ही चाहिए। इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट भी कह रही है कि चौराहों पर काम हो। इस रिपोर्ट का अध्ययन कर आला अधिकारियों से बात करेंगे। -संजीव वाजपेयी, एसपी
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