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स्मार्ट सिटी प्रबंधन के लिए मेरठ को मिलेंगे 250 करोड़

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मेरठ। राज्य स्मार्ट सिटी के तहत महानगर के तेजी से विकास के लिए पांच साल में नगर निगम को 250 करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन की गाइड लाइन 2019 बना दी है। कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें डीएम व नगरायुक्त सदस्य होंगे। समिति डीपीआर बनाकर शासन को भेजेगी।
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कमिश्नर मेश्राम ने शनिवार को बैठक में कहा कि जो नगर निगम केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में शामिल होने से रह गए थे, उनको स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मंडल के ऐसे निगमों में मेरठ व गाजियाबाद शामिल हैं। इन्हें स्मार्ट एवं सेफ सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। कमिश्नर ने पर्याप्त जलापूर्ति के लिए जल निगम, सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग, स्ट्रीट लाइट के लिए नगरायुक्त, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व सफाई के लिए नगरायुक्त, सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन के लिए परिवहन विभाग, सिटी ट्रांसपोर्ट रोडवेज अधिकारियों को तथा आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के लिए वीसी एमडीए को, स्वच्छ पर्यावरण के लिए डीएफओ को, महिलाओं, बच्चों व वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग को, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए एडी स्वास्थ्य व जिला विद्यालय निरीक्षक को उनके विभाग द्वारा किए जाने वाले कार्यों के संबंध में प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर सात नवंबर को डीएम की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सिटी ट्रैफिक के लिए साफ्टवेयर व मोबाइल एप बनाने, वन विभाग को ग्रीन स्पेस पार्क विकसित करने तथा स्वास्थ्य विभाग को टेलीमेडिसन पर कार्य करने के निर्देश दिए।
डीएम अनिल ढींगरा ने कहा कि समिति राज्य स्मार्ट सिटी विकास परियोजनाओं की योजना, मूल्यांकन, चयन, धनराशि निर्गत कराने, कार्यान्वयन, प्रबंध, निगरानी तथा आकलन के लिए कार्य करेंगी। स्मार्ट सिटी मिशन को एक राज्य प्रायोजित स्कीम के रूप में चलाया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा आगामी पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
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