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Meerut: तीन दिन की बारिश का कमाल, काली नदी में लौटी जलधारा, वर्षों बाद दिखा पुराना स्वरूप

Sat, 11 Jul 2026 05:05 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में लगातार तीन दिन की बारिश के बाद काली नदी में वर्षों बाद साफ जलधारा बहने लगी है। सूखी पड़ी नदी का बदला स्वरूप देखकर ग्रामीणों में खुशी है और नदी के पुनर्जीवन की उम्मीद फिर से जाग उठी है।
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बारिश के बाद काली नदी में लौटी जलधारा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में लगातार तीन दिन तक हुई मूसलाधार बारिश ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली काली नदी को नया जीवन दे दिया है। वर्षों से सूखी पड़ी और गंदे पानी तक सीमित रह गई नदी में अब साफ वर्षा जल बहता दिखाई दे रहा है। नदी का बदला स्वरूप देखकर आसपास के गांवों के लोगों में खुशी की लहर है। ग्रामीण इसे प्रकृति का अनमोल उपहार बता रहे हैं।

वर्षों बाद नदी में बहा साफ पानी

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खतौली क्षेत्र के अंतवाड़ा से निकलने वाली करीब 460 किलोमीटर लंबी काली नदी कन्नौज से पहले गंगा नदी में मिलती है। कभी यह नदी क्षेत्र की सिंचाई, भूजल संरक्षण और पर्यावरण का प्रमुख आधार थी, लेकिन अतिक्रमण, प्रदूषण और प्राकृतिक जल स्रोतों के कमजोर होने से इसका अस्तित्व संकट में पड़ गया।

अधिकांश हिस्सों में नदी सूखी रहने लगी और उसमें केवल गांवों का गंदा पानी ही बहता था।पिछले तीन दिनों की लगातार बारिश के बाद वर्षा का पानी नदी में पहुंचा, जिससे उसमें फिर से साफ जलधारा बहने लगी। नदी किनारे फैली हरियाली और बहते पानी का दृश्य लोगों को वर्षों पुरानी यादों में ले गया।
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ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद
मीठेपुर निवासी 65 वर्षीय अजयवीर ने बताया कि बचपन में उन्होंने काली नदी को पूरे वेग से बहते देखा था। शनिवार सुबह देदवा गांव के पास नदी को उसी पुराने स्वरूप में देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उनका कहना है कि वर्षों बाद ऐसा नजारा देखने को मिला है।

देदवा गांव निवासी और दौराला ब्लॉक प्रमुख के पति ऋषिपाल भंडारी ने कहा कि यदि मानसून के दौरान इसी तरह कुछ और अच्छी बारिश होती रही और नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया गया, तो काली नदी दोबारा अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।

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अभियानों से नहीं मिला परिणाम, प्रकृति ने बदली तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं ने समय-समय पर काली नदी के पुनर्जीवन के लिए सफाई अभियान चलाए और कई योजनाएं भी बनाई, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इस बार लगातार हुई बारिश ने वह कर दिखाया, जिससे लोगों में नदी के पुनर्जीवन की नई उम्मीद जगी है।

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