फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut: प्रदीप मिश्रा बोले- जो भगवान में तन-मन-धन नहीं लगाते, उनके बच्चे शराब के ठेकों में मन लगाते हैं

Mon, 16 Dec 2024 09:36 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में चल रही शिवमहापुराण कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कथा श्रवण के लिए आ रहे हो तो जेवर और तेवर दोनों को घर छोड़कर आओ। 
विज्ञापन
कथा में उपस्थित श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हम तो बाबा के भरोसे चलते हैं, ये दुनिया वाले क्यों जलते हैं..., इतनी कर दे कृपा मेरे गुरुवर तेरे चरणों में जीवन बिताएं...जैसे भजनों के साथ कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा ने भगवान शिव का गुणगान किया तो श्रद्धालु झूमने लगे। ऐसे भजनों के साथ ही भोले बाबा से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। कथावाचक ने लोगों से कहा कि वे बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार दें और अपने जीवन को शिव के नाम समर्पित करते हुए कर्म करें।
विज्ञापन

कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला
शताब्दीनगर में चल रही शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन सोमवार को पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कर्म तो भोगना ही पड़ेगा। दो कारण से मानव शरीर मिला है। हम शंकर के हो जाएं और शंकर हमारे हो जाएं। कई संत ऐसे रहे जो सशरीर भगवान में समा गए। मां अंबा में समा गए रामकृष्ण परम हंस, जगन्नाथ जी में समा गए चैतन्य महाप्रभु, विट्ठल में समा गए संत तुकाराम, कृष्ण में समा गई मीरा। शरीर में अगर कोई रोग आ गया तो श्री शिवाय नमस्तुभ्यम का जाप करो।

कथा में श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
कथा के बीच उन्होंने रोहटा रोड निवासी पूनम की चिट्ठी पढ़ी। बताया कि शिव उपासना से उसकी आवाज लौट आई। उन्होंने कहा कि सुबह, दोपहर, शाम लो शिव का नाम। 
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आज के जमाने में नेता भी एक मुखी नहीं होते हैं। आज एक पार्टी में हैं और कल दूसरी पार्टी में शामिल हो जाएंगे। 

कथा में मौजूद श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
बच्चों को संस्कार देने में समय लगाएं
माता पिता का दायित्व है कि अपना ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों को संस्कार देने में लगाएं। जो अपना तन, मन, धन भगवान में नहीं लगाते, उनके बच्चे शराब के ठेकों में मन लगाते हैं। घर से बाहर जाते समय बहन, बेटी, पत्नी के नेत्र झुके हैं तो भाई, पिता और पति का कभी सिर नहीं झुकता। गंदी सोच रखने वालों को कभी तरक्की नहीं मिलती। जिस गांव में पानी की कमी होती है, वहां फसल खराब हो जाती है। ऐसे ही जिस घर में संस्कारों की कमी होती है, वहां की नस्ल खराब हो जाती है।
 
विज्ञापन

कथा में लीन श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
कथा में जेवर और तेवर छोड़कर आओ
उन्होंने कहा कि कथा श्रवण के लिए आ रहे हो तो जेवर और तेवर दोनों को घर छोड़कर आओ। तुम्हारी पहचान कुछ भी हो, पर उस श्मशान में रहने वाले शिव के सामने तुम कुछ नहीं होगे। चार बांस, चार कंधों और 40 कंडे पर चले जाओगे। उन्होंने कहा कि बेटी को अच्छी शिक्षा दो। यही वर्तमान युग में बेटी के लिए सबसे बड़ा कन्यादान है। 
जमीन पर बैठे लोग ही जमींदार
कथा वाचक ने कहा कि कथा सुनने वाले बड़े होते हैं। कथा वाचक तो 3 घंटे की ड्यूटी कर चला जाएगा। जमीन पर बैठकर कथा सुनने वाले लोग असली जमींदार हैं। 

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें