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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: सरकारी अस्पताल में मिलेगा प्राइवेट जैसा इलाज, ये रहा टैरिफ प्लान

Thu, 14 Feb 2019 01:00 PM IST
कपिल kapil अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ
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महिला जिला अस्पताल
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अगर आप सरकारी महिला जिला अस्पताल में प्राइवेट जैसा इलाज चाहते हैं, तो अब वह भी आपको मिलेगा। इसके लिए अस्पताल में टैरिफ प्लान लागू किया गया है, जिसके तहत मरीज को निम्न दरों पर ऑपरेशन और ब्लड की सुविधा मुहैया होगी। साथ ही एसी रूम मिलेगा।

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महिला जिला अस्पताल में हर साल पांच हजार से ज्यादा डिलीवरी होती हैं। इनमें अधिकांश जनरल वार्ड में होती हैं। लेकिन अब निजी अस्पतालों जैसी सुविधाएं देने का निर्णय लिया गया है। प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले यह चार्ज कम है। प्राइवेट में डिलीवरी, ऑपरेशन का खर्च हजारों रुपये में आता है।

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यहां प्राइवेट नौ वार्ड
महिला जिला अस्पताल 100 बेड का है। करीब सात माह पहले ही अस्पताल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया है। अलग-अलग फ्लोर पर गर्भवती महिलाओं के लिए वार्ड बने हुए हैं। प्राइवेट नौ वार्ड बनाए गए हैं। इसके अलावा कंगारू केयर यूनिट शुरू होने वाली है। एसएनसीयू है, जिसमें प्रीमैच्योर बच्चे रखे जाते हैं।

150 यूनिट चढ़ा रक्त
महिला जिला अस्पताल में पिछले सात माह में करीब एक हजार महिलाओं को लगभग डेढ़ सौ यूनिट रक्त चढ़ा है। इनमें हीमोग्लोबिन की कमी थी। हालत गंभीर होने पर इनमें से 238 महिलाओं को हायर सेंटर मेडिकल रेफर किया गया है। अब कोशिश रहेगी कि कम महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जाए। यहीं इलाज देने की कोशिश की जाएगी।

यह है टैरिफ प्लान
विवरण       जनरल वार्ड       प्राइवेट वार्ड
 मेजर ऑपरेशन   निशुल्क       800 रुपये
 नार्मल डिलीवरी   निशुल्क      800 रुपये
 ब्लड       निशुल्क       150 रुपये प्रति यूनिट
 रूम चार्ज        निशुल्क       334 रुपये (एसी)
 बिना एसी चार्ज  निशुल्क       102 रुपये 
 आईवी ड्रिप        निशुल्क         80 रुपये प्रतिदिन

निजी अस्पताल से सस्ती है व्यवस्था
इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है। यह निजी अस्पताल से काफी सस्ती है। बहुत से मरीज चाहते हैं कि वह एक रूम में रहें तो उनके लिए यह सुविधा है। इस यूजर चार्ज से जो पैसा आएगा, उसे अस्पताल की बेहतरी के लिए खर्च किया जाएगा। -डॉ. मनीषा वर्मा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल
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निजी अस्पतालों को मिलेगी टक्कर
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मनीषा वर्मा ने कहा है कि यह व्यवस्था निजी अस्पताल से बहुत सस्ती है। ऐसे में यदि लोग निजी अस्पतालों की जगह सरकारी अस्पताल का रुख करते हैं तो उन्हें लाभ ही होगा। यदि सरकारी व्यवस्था बेहतर तरीके से चलेगी तो इससे निजी अस्पतालों को टक्कर मिलेगी। वैसे भी सरकारी अस्पताल में उपचार बेहतर ही मिलता है।

नियम हैं अजीबोगरीब 
इस टैरिफ प्लान में कई नियम कुछ अजीबोगरीब भी हैं। मसलन अगर आप जनरल वार्ड में ऑपरेशन कराते हो या ब्लड चढ़वाते हो तो कोई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन अगर अस्पताल के ही प्राइवेट वार्ड में ऑपरेशन या ब्लड चढ़वाते हो तो आपको चार्ज देना होगा। हालांकि दोनों जगह अस्पताल के वही डॉक्टर ऑपरेशन करेंगे। इतना ही नहीं, अगर प्राइवेट वार्ड में डिलीवरी भी होती है तो भी अलग से ऑपरेशन वाला ही चार्ज देना पड़ेगा। साथ ही अगर ड्रिप भी लगवाते हैं तो उसका भी चार्ज लगेगा। सामान्य तौर पर मरीजों के लिए प्राइवेट वार्ड का चार्ज होता है, क्योंकि वह अलग से होते हैं और उसमें एक ही मरीज रहता है, लेकिन उसमें भर्ती होते ही सरकारी सुविधाएं खत्म हो जाएंगी।

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