सीसीएसयू के खिलाड़ी सुविधाओं के अभाव में दूसरे विश्वविद्यालयों का रुख कर रहे हैं। होनहार खिलाड़ियों के जाने से विवि को तगड़ा झटका लगा है। आठ साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब सीसीएसयू को 2015-16 सत्र में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी लेवल पर एथलेटिक्स में एक भी मेडल नहीं मिला है। दूसरी यूनिवर्सिटी अच्छे खिलाड़ियों पर नजर गड़ाए हैं। उन्हें सुविधाओं और आर्थिक मदद का ऑफर दे रही हैं।
जैवलिन थ्रोवर अन्नू रानी की रेलवे में जॉब लग गई। तीन हजार मीटर स्टीपल चेज में नेशनल और यूनिवर्सिटी लेवल पर कई रिकॉर्ड बनाने वाली पारुल चौधरी पूर्वांचल यूनिवर्सिटी चली गईं। इसके अलावा भी सीसीएसयू के खिलाड़ी पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, जीएनडीयू अमृतसर, पूर्वांचल यूनिवर्सिटी, एमडीयू रोहतक, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और कुमाऊं यूनिवर्सिटी से खेल रहे हैं।
ये यूनिवर्सिटी खिलाड़ियों को रियायत और विशेष सुविधाएं दे रही हैं। उनके लिए नियमों में भी फेरबदल कर रही हैं। पटियाला यूनिवर्सिटी ने तो बीपीएड कोर्स में सीट तक रिजर्व कर रखी हैं। बेहद कम फीस में बीपीएड कराई जा रही है। खिलाड़ियों को निशुल्क हॉस्टल तक की सुविधा दी जा रही है।
इन खिलाड़ियों ने छोड़ा दामन
सीसीएसयू के बाहर खेलने वाले खिलाड़ियों में 3000 मीटर स्टीपल चेज में पारुल चौधरी पूर्वांचल यूनिवर्सिटी से, जैवलिन थ्रो में गौरव नेहरा कुरुक्षेत्र विवि से, जैवलिन थ्रो में ही विपिन कसाना कुमाऊं विवि से, 200 मीटर दौड़ में नितिन चौधरी पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से, विकास सैनी 800 और 1500 मीटर में पटियाला यूनिवर्सिटी से, प्रीति पांच हजार और 10 हजार मीटर दौड़ में पटियाला यूनिवर्सिटी से खेल रही हैं। इन खिलाड़ियों ने सीसीएसयू के लिए कई बार मेडल जीते थे।