ऑडियो करीब डेढ़ साल पुराना बताया जा है। ऑडियो में तीनों व्यक्ति एक-दूसरे को नाम से पुकार रहे हैं, जिससे उनकी पहचान भी उजागर हो रही है। इन तीन लोगों में एक व्यक्ति वाहन कटान के मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी के परिवार का सदस्य है। दूसरे व्यक्ति को हाजी कहकर बुलाया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि तीसरा व्यक्ति सदर थाने का तत्कालीन सिपाही है, जो वाहन कटान करने वालों और पुलिस अधिकारियों के बीच बिचौलिये का काम करता था।
इस तरह हो रही है बातचीत
मुख्य आरोपी के परिवार का सदस्य : देखो भाई, एसओ साहब के पास डेढ़ लाख रुपये जा रहे थे और तुम्हारे पास जा रहे थे 25 हजार रुपये। चौकी इंचार्ज और दूसरे चौकी इंचार्ज को भी रुपये जा रहे थे। भाजपा नेता (यहां पर भाजपा नेता और दोनों सिपाहियों का नाम लिया जा रहा है) को 20 और दोनों सिपाहियों को भी 40 हजार रुपये जा रहे थे।
पुलिसकर्मी : चौकी इंचार्ज को भी 25 हजार रुपये जा रहे थे।
मुख्य आरोपी के परिवार का सदस्य : एक बार एसओ साहब ने अज्जू को बैठा लिया था, तब अज्जू से पूछा था कि कितने आ रहे थे। भाई तुम एसओ को मैनेज करते थे, फिर भी मान नहीं रखा। एसओ ने हमें नुकसान पहुंचाया। उस महीने में 14 गाड़ी खोली और हर गाड़ी के 25 हजार रुपये तुम्हें दिए।
पुलिसकर्मी : डेढ़ लाख के अलावा एसओ को हर गाड़ी पर 10 हजार रुपये जा रहे थे। एसओ अगर मना करता है तो मुझे बुला लेना। मैं आमने-सामने आकर स्पष्ट कर दूंगा।
पव्वा जेल से बाहर आ गया तो सामने कर दूंगा
मुख्य आरोपी के परिवार का सदस्य : देखो हमेशा थाने के हेड तुम रहे हो, इंस्पेक्टर साहब के पास कोई पोजिशन रही तो तुम्हारी रही। किसी और की नहीं रही। तुम्हें मैनेज करना था।
पुलिसकर्मी : पव्वा जेल से बाहर आ जा जाएगा तो सामने करा दूंगा। मैंने कई बार कहा था कि रुपये दे दो नाम निकलवा दूंगा।
मुख्य आरोपी के परिवार का सदस्य : रुपये नहीं मोबाइल मांगा जा रहा था। अभी के जो हालात हैं, अगर किसी ने अधिकारी के पास रिपोर्ट लगा दी तो सब पर निगाह रख लेगा। इतने बुरे हालात हैं। इनोवा में बहुत रुपये घटे। डेढ़ लाख रुपये महीने और 10 हजार रुपये प्रति गाड़ी जा रहा था। कल जाकर एसओ साहब के पास पूछूंगा।
पुलिसकर्मी : एक भी गाड़ी कट जाएगी क्या बिना एसओ के। अगर मेरा सगा इस समय कोई मंत्री भी है और मैं सिपाही हूं और मैंने एसओ को फोन करा दिया, तब भी एसओ के बिना गाड़ी नहीं खुल सकती।
हाजी : हां ये तो है, पुलिस की मर्जी के बिना तो गाड़ी नहीं खुल सकती।
नोट : यह तीनों व्यक्ति आपस में बैठ कर बात कर रहे थे। यह ऑडियो उसी समय की बताई जा रही है। हालांकि अमर उजाला इसकी पुष्टि नहीं करता। जो पुलिसकर्मी बिचौलिये की भूमिका निभा रहा है उसका और बाकी दोनों पुलिसकर्मियों का यहां से तबादला हो गया है।
यह ऑडियो पुराना बताया जा रहा है। ऑडियो को सुनकर हर तथ्य देखा जाएगा। वाहन चोरी करने वालों पर पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। हाल ही कई केस भी खुले हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी