2014 में सेना में हुए थे भर्ती
ज्ञानेश्वर वर्ष 2014 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। अपनी लगन, अनुशासन और उत्कृष्ट सेवा के चलते उन्हें दो वर्ष पहले नायक के पद पर पदोन्नत किया गया था। वह भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
गांव में शोक, परिवार को बेटे पर गर्व
ज्ञानेश्वर तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई प्रदीप भी भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात हैं और देश की सेवा कर रहे हैं।
शहादत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। गांव के लोगों और क्षेत्रवासियों ने भी वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। परिजनों ने गहरे दुख के बीच अपने बेटे की देशभक्ति और वीरता पर गर्व व्यक्त किया।
शाम तक पहुंचेगा पार्थिव शरीर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहीद ज्ञानेश्वर का पार्थिव शरीर शाम करीब सात बजे उनके पैतृक गांव रछौती पहुंचने की संभावना है। गांव में अंतिम दर्शन और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।