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Meerut: अक्षय तृतीया पर अबूझ मुहूर्त में नहीं गूंजेगी शहनाई, जुलाई में पांच दिन होंगे विवाह

Wed, 08 May 2024 01:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि विवाह मुहूर्त में गुरु और शुक्र के अस्त का भी विचार किया जाता है।
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बाजारों में अक्षय तृतीया के लिए सजा बाजार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अक्षय तृतीया (10 मई) पर अबूझ मुहूर्त में इस बार शहनाई नहीं गूंजेगी। बैंडबाजा नहीं बजेगा। वर्षों बाद इस बार ऐसा हो रहा है। इसका कारण गुरु और शुक्र ग्रह का अस्त होना है। वहीं, सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा वृष में उच्चस्थ हैं।

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इसलिए सोने सहित अन्य आभूषणों या वस्तुओं की खरीदारी की जा सकती है। गुरु ग्रह छह मई को अस्त हुए थे। वह अब 2 जून को उदित होंगे।  शुक्र ग्रह 24 अप्रैल को अस्त हुए थे। वह अब सात जुलाई को उदित होंगे।

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि विवाह मुहूर्त में गुरु और शुक्र के अस्त का भी विचार किया जाता है। अच्छा शुक्र भोगविलास का नैसर्गिक कारक है।
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यह दांपत्य सुख को दर्शाता है। गुरु कन्या के लिए पति सुख का कारक है। आचार्य मनीष स्वामी ने बताया दोनों ग्रहों का शुभ विवाह हेतु उदय होना शास्त्र सम्मत है। इनके अस्त रहने पर विवाह नहीं होते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र में विवाह के लिए कुंडली मिलान, गुण दोष मिलान किया जाता है। इसके अलावा गुरु और शुक्र को विवाह का कारक ग्रह माना जाता है। आकाश मंडल में गुरु और शुक्र ग्रह उदित हों तो ही विवाह के शुभ मुहूर्त होते हैं। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होता। पंडित भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि अक्षय तृतीया पर खरीदारी में कोई अड़चन नहीं है। 

सामान्य परिस्थितियों में इस तिथि में कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के निमित्त पूजन करना चाहिए। तीर्थस्थल पर दान देने की परंपरा भी है।
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अब जुलाई में पांच दिन होंगे विवाह
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि गुरु व शुक्र तारा उदित होने के बाद ही अब 9 जुलाई से विवाह समारोह होंगे। जुलाई में 9,11, 12, 13 व 15 तारीख में विवाह होंगे। इनमें चंद्र बल व गुरु बल की गणना से तारीख का चयन किया जा सकता है। बाद में 17 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ फिर से ऐसे आयोजनों पर विराम लग जाएगा।

आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को विष्णु भगवान का परशुराम के रूप में अवतार हुआ था। सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत इसी तिथि पर हुई थी। इसी दिन से वेद व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया।
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