ज्योतिष शास्त्र में विवाह के लिए कुंडली मिलान, गुण दोष मिलान किया जाता है। इसके अलावा गुरु और शुक्र को विवाह का कारक ग्रह माना जाता है। आकाश मंडल में गुरु और शुक्र ग्रह उदित हों तो ही विवाह के शुभ मुहूर्त होते हैं। यदि ये ग्रह अस्त हों तो विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होता। पंडित भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि अक्षय तृतीया पर खरीदारी में कोई अड़चन नहीं है।
सामान्य परिस्थितियों में इस तिथि में कोई भी शुभ काम बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। यही वजह है कि लोग घरों में वैवाहिक कार्यक्रम, धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, व्यापार, जप-तप और पूजा-पाठ करने के लिए अक्षय तृतीया के दिन को ही चुनते हैं। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के निमित्त पूजन करना चाहिए। तीर्थस्थल पर दान देने की परंपरा भी है।
अब जुलाई में पांच दिन होंगे विवाह
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि गुरु व शुक्र तारा उदित होने के बाद ही अब 9 जुलाई से विवाह समारोह होंगे। जुलाई में 9,11, 12, 13 व 15 तारीख में विवाह होंगे। इनमें चंद्र बल व गुरु बल की गणना से तारीख का चयन किया जा सकता है। बाद में 17 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ फिर से ऐसे आयोजनों पर विराम लग जाएगा।
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया को विष्णु भगवान का परशुराम के रूप में अवतार हुआ था। सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत इसी तिथि पर हुई थी। इसी दिन से वेद व्यास जी ने महाभारत ग्रंथ लिखना आरंभ किया।