प्लॉट मालिक अमित धारीवाल ने कहा कि यह जमीन उन्होंने 4 साल पहले किसानों से खरीदी थी। इसकी रजिस्ट्री तहसील में कराई गई और दाखिल-खारिज भी हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन विवादित थी तो रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज कैसे हो गया?
किसानों ने भी कहा कि पिछले चार साल से इस प्लॉट पर कार्यालय बना हुआ है और मेडा अधिकारी रोजाना यहां से गुजरते रहे हैं, लेकिन अब अचानक कार्रवाई की जा रही है।
हंगामे के बीच प्लॉट मालिक ने मेडा अधिकारियों से एक सप्ताह का समय मांगा और उचित समाधान निकालने की मांग की।