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मेरठ: आठ साल जेल में बंद रहा शाहनवाज, वकील करने के भी नहीं थे पैसे, न्याय मित्र ने लड़ा केस; साबित हुआ बेकसूर

Fri, 04 Sep 2026 12:27 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ के लिसाड़ीगेट क्षेत्र के निवासी शाहनवाज पर रेस्टोरेंट संचालक तैयब ने गोली चलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था। अदालत ने कोई साक्ष्य न होने पर शाहनवाज को बरी कर दिया। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : adobestock
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विस्तार
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थाना लिसाड़ी गेट के रहने वाले शाहनवाज उर्फ टूटा को घटना के पुख्ता साक्ष्य न्यायालय में पेश न होने पर न्यायालय ने बरी कर दिया। उसके खिलाफ आठ साल पहले जानलेवा हमले का केस कराया गया था। तब से वह जेल में ही बंद था। उसके पास वकील को देने के लिए भी पैसे नहीं थे। एक बार भी उसे जमानत नहीं मिल सकी। 
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24 जून 2018 को शाहपीर गेट स्थित रेस्टोरेंट चलाने वाले तैयब ने थाना लिसाड़ी गेट में केस दर्ज कराया कि वह कैश काउंटर पर शाम 7:45 बजे बैठा हुआ था। तभी एक अज्ञात आदमी आया और बिरयानी मांगी। उसने बताया कि बिरयानी खत्म हो गई है। इस पर वह गुस्से में आ गया और उसे जान से मारने की नीयत से गोली चला दी। जो उसको कंधे से छूती हुई निकल गई।
 

न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। इसके अतिरिक्त पुलिस और डॉक्टर की भी गवाही हुई। बचाव पक्ष ने आरोपी को साजिश के तहत फंसाने की बात कहते हुए बताया कि उसके विरुद्ध कोई भी पुख्ता साक्ष्य कातिलाना हमला करने के नहीं है, ना ही कोई मेडिकल रिपोर्ट है। 
 

न्यायालय को अवगत कराया कि 2019 से आरोपी शाहनवाज उर्फ टूटा जेल में बंद है। गरीब होने के कारण सरकार की ओर से न्याय मित्र को इस मुकदमे को लड़ने की जिम्मेदारी दी गई। न्यायालय अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम आलोक द्विवेदी ने दोनों पक्षों को सुनते हुए कोई पुख्ता साक्ष्य न पाए जाने पर आरोपी को बरी कर दिया। विशेष बात यह रही कि आरोपी पिछले आठ वर्षों से जेल में बंद है।
 

किशोरी से छेड़छाड़ के आरोपी को तीन वर्ष का कारावास
15 साल की किशोरी के साथ छेड़छाड़ के आरोपी सचिन उर्फ फुल्ला को न्यायालय अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट पोक्सो ने तीन वर्ष के कारावास और चार हजार रुपये के जुर्माना से दंडित किया।
किया।
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थाना सरधना के एक गांव के रहने वाले व्यक्ति ने सात अक्तूबर 2019 को एफआईआर दर्ज कराई कि वह अपनी पत्नी को ससुराल लेकर गया था। घटना के दिन उसकी नाबालिग बेटी गोबर के उपले पाथने के लिए जा रही थी। तभी रास्ते में आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया और जबरदस्ती अपने साथ एक कमरे में ले गया। शोर मचाने पर मौके पर गांव के लोग पहुंचे तो आरोपी भाग गया। उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी सचिन उर्फ फुल्ला को दोषी मानते हुए ती साल के कारावास और चार हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
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