शैक्षिक योग्यता और लोकसभा में उनकी सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा था कि वह इस बार मंत्रिमंडल में अवश्य शामिल होंगे। लेकिन बृहस्पतिवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में उनका नाम मंत्रिमंडल की सूची से बाहर देख मेरठ के लोगों को मायूसी हाथ लगी।
माना यह भी जा रहा है कि उनकी जीत में वोटों का अंतर काफी कम रहा। इससे भी उनका नाम मंत्रियों की सूची में नहीं रखा गया। हालांकि यही समीकरण मुजफ्फरनगर में भी रहा। लेकिन वहां संजीव बालियान को जैसे चौधरी अजित सिंह को पटखनी देने का इनाम दिया गया।
डॉ. वाजपेयी का बढ़ सकता है कद
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कद अब बढ़ सकता है। क्योंकि प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडे जो कि इस बार भी सांसद निर्वाचित हुए हैं, उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। डॉ. वाजपेयी 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष थे और उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 73 सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया था।
लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले डॉ. वाजपेयी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसे लेकर संगठन के कुछ पदाधिकारियों से उनकी न बनने की चर्चा ज्यादा रही। लेकिन अब एक बार फिर से उनको संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की उम्मीद जताई जा रही है।