पूरे सत्र में रहे सबसे भरोसेमंद गेंदबाज
भुवनेश्वर कुमार पूरे सत्र में बंगलूरू के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज साबित हुए। नई गेंद से लगातार शुरुआती सफलताएं दिलाने के साथ उन्होंने अंतिम ओवरों में भी बेहद किफायती गेंदबाजी की। प्रतियोगिता में उन्होंने कुल 28 विकेट हासिल किए और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे। पर्पल कैप उनसे केवल एक विकेट दूर रह गई। उनकी लगातार शानदार गेंदबाजी ने बंगलूरू को पूरे सत्र में मजबूती दी और खिताब तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।
कई मुकाबलों में पलटा मैच का रुख
सत्र के दौरान भुवनेश्वर कुमार ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में निर्णायक प्रदर्शन किया। नई गेंद से विकेट निकालने की उनकी क्षमता और दबाव की परिस्थितियों में शांत रहने का स्वभाव टीम के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी उनकी स्विंग और नियंत्रण की जमकर सराहना की। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भी उनकी विशेष गेंदबाजी तकनीक और सीम नियंत्रण को इस सत्र की बड़ी ताकत बताया।
उम्र केवल आंकड़ा, अनुभव बना सबसे बड़ा हथियार
36 वर्ष की उम्र में भी भुवनेश्वर कुमार ने साबित कर दिया कि अनुभव, अनुशासन और सटीक लाइन-लेंथ के दम पर किसी भी मजबूत बल्लेबाजी क्रम को परेशान किया जा सकता है।
मेरठ के इस तेज गेंदबाज ने पूरे सत्र में अपनी गेंदबाजी से अलग पहचान बनाई और खिताबी अभियान में अहम भूमिका निभाकर एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों के असली खिलाड़ी वही होते हैं जो दबाव में सबसे बेहतर प्रदर्शन करें। आरसीबी की इस ऐतिहासिक सफलता में उनका योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा।