अक्सर रहने वाले इन हालातों की गूंज मंगलवार को विधानसभा में भी सुनाई दी। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने विधानसभा में ट्रैफिक जाम की बढ़ती समस्या के निराकरण के लिए बनाई गई व्यवस्था के विषय में सवाल किया। जवाब में बताया गया कि जाम से निजात के लिए महानगरों में आईटीएमएस की स्थापना की गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाती है।
दिल्ली रोड पर रैपिड का काम जोरों पर चल रहा है। लेकिन इसके लिए लोगों की सहूलियत का ख्याल नहीं रखा जा रहा। कहीं भी कभी भी बिना सूचना के रास्ता बंद कर दिया जाता है। बड़ी-बड़ी मशीनें आड़ी- तिरछी खड़ी होती हैं। गाड़ियों के निकलने के लिए ट्रैफिक पुलिस से सामन्जस्य बनाकर कोई व्यवस्था नहीं की जाती। मनमाने ढंग से जगह-जगह बेरिकेडिंग लगाकर डायवर्जन कर दिया जाता है और रास्ता तय करने में लोगों की कमर में बल पड़ जाते हैं। मंगलवार को दिल्ली रोड के हाल बदहाल हुए तो लोग फुटबाल चौराहे से बागपत रोड की ओर जाने लगे। इससे बागपत रोड पर भी भारी जाम लग गया। टीपीनगर तक वाहन रेंगते रहे। बेतरतीब वाहन चलाने और आड़े-तिरछे खड़े ट्रकों के चलते टीपीनगर रोड पर भी वाहनों की रफ्तार मंद पड़ गई। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हुई। स्कूल से घर पहुंचने में बहुत अधिक वक्त लगने पर अभिभावक भी परेशान हो उठे।
धूल और धुआं लोगों को बना रहा रोगी
एनसीआरटीसी की ओर से लोगों के स्वास्थ्य की कोई चिंता जमीनी स्तर पर नहीं दिख रही। काम से पहले पानी के छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं है। जीरो माइल्स, शारदा रोड के सामने, भैंसाली बस अड्डे के पास, शताब्दीनगर में यार्ड के आसपास भारी वाहन चलने से धूल का गुबार उठता रहता है। इससे लोग रोगी बन रहे हैं। छाती रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर कहते हैं कि धूल और धुएं के सूक्ष्म कण फेफड़ों में श्वांस तंत्र को कमजोर कर देते हैं। इससे रोग बढ़ता है। ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ी है।
शहर में जाम न लगे इसको लेकर सभी टीआई को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जहां जाम की समस्या है, वहां का निरीक्षण करके समाधान निकाला जाएगा। - राघवेंद्र कुमार मिश्र, एसपी यातायात