तीन तरह की होती है सीओपीडी
छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि श्वांस मार्ग के आसपास मौजूद छोटी-छोटी मांसपेशियों के कारण श्वास मार्ग दबने लगता है और उसमें बलगम बनने लगता है। वह खांसी के जरिये बाहर आता है। इससे मरीज को फेफड़ों में भारीपन महसूस होता है। उन्होंने बताया कि सीओपीडी तीन तरह की होती है, माइल्ड सीओपीडी, जिसमें खांसी में बलगम आना और सांस फूलना, मोडरेट सीओपीडी में इन दोनों लक्षणों के साथ छाती में इंफेक्शन को ठीक होने में कई सप्ताह लग जाना और सीवियर सीओपीडी इन तीनों लक्षणों के अतिरिक्त बैठे हुए भी सांस फूल जाना है।
कॉइल भी खतरनाक
डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि एक मॉस्किटो कॉइल 100 सिगरेट से ज्यादा धुआं उत्सर्जित करती है। ग्रामीण इलाकों में श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त अधिकतर मरीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि ये उचित इलाज नहीं कराते हैं। इसका आधुनिक इलाज इनहेलर के रूप में उपलब्ध है।
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