दस महीने के अंतराल में ही फाटक के दोनों ओर की सड़क टूट गई। हालांकि, इस बीच एक बार पैचवर्क किया गया लेकिन बात नहीं बन सकी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यातायात दबाव होने के चलते ऐसा हो रहा है। जिससे बार-बार मरम्मत करनी पड़ रही है। इस फाटक पर चार लाख ट्रैफिक मल्टीपल यूनिट (रेलवे का आंकड़ा) है। इतना अधिक यातायात दबाव होने के कारण रेलवे ओवरब्रिज बनाया जाना जरुरी है। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
तो चाहिए एक महीने का बंद
अगर डामर की सड़क से छुटकारा पाना है तो एक महीने तक बिजली बंबा बाईपास को बंद करना होगा। ऐसा असंभव सा नजर आता है। सीमेंटेड रोड़ बनाने के लिए एक महीने तक बिजली बंबा बाईपास को बंद करना होगा। ऐसा रेलवे अधिकारियों का दावा है। इसके बन जाने के बाद कुछ हद तक कई सालों के लिए बार-बार बिजली बंबा बाईपास बंद करने से छुटकारा मिल जाएगा।
नहीं जाग रहा शासन-प्रशासन
बिजली बंबा बाईपास के चौड़ीकरण और इनर रिंग रोड की कवायद शुरू हुई थी। एक बार फिर फाइल दब गई है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार 80 से एक लाख वाहन बाईपास से रोजाना गुजर रहे हैं। इसके बाद भी शासन से बजट नहीं आ रहा है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी बाईपास के निस्तारण के लिए मजबूती से सरकार के सामने पक्ष नहीं रख रहे हैं। इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ रहा है।