इसी का नतीजा है कि शनिवार को दो हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र और विपिन सहित चार लोग जेल की पार्किंग में हथियार लेकर पहुंच गए। बदमाशों ने पहले धमकी दी, फिर 10 मिनट बाद जेल की पार्किंग में घुसकर रसूलपुर, भावनपुर ग्राम प्रधान पर गोलियां चला दीं। एक आरोपी पुनीत वहां से भाग निकला। भले ही मेडिकल पुलिस हिस्ट्रीशीटर शोकिंद्र, विपिन और हत्यारोपी के बेटे शुभम को गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन वारदात ने मेरठ और जेल पुलिस के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।
इंस्पेक्टर मेडिकल दिनेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि हत्यारोपी पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र चौधरी का ट्रायल कोर्ट में लगभग पूरा हो चुका है। कोर्ट जल्द ही फैसला सुना सकती है। कई बंदी जेल परिसर में खेतीबाड़ी भी करते हैं। सात साल पहले एक बंदी खेतीबाड़ी करते हुए फरार हो चुका है।
संवेदनशील क्षेत्र है जेल मार्ग :
जेल चुंगी से जेल मार्ग तक का क्षेत्र बेहद संंवेदनशील है। जेल में 2500 से अधिक बंदी हैं। इसकी सुरक्षा में पुलिस बल तैनात है। बंदियों पर निगरानी के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है। फिर भी यहां घटना हुई।
यह भी पढ़ें: Mission 2024: भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड, सतेंद्र सिसोदिया पर दांव, पश्चिम से घटी पदाधिकारियों की संख्या