केस : एक
कंकरखेड़ा में होटल में दरोगा को भाजपा पार्षद ने पीटा। पार्षद के पक्ष में भाजपा उतर गई। मुख्यमंत्री से भी शिकायत की गई। चौतरफा दबाव पड़ते ही पुलिस बैकपुट पर आई। पार्षद पर लगी डकैती की धारा हटाकर दरोगा और महिला वकील पर जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। जिससे पुलिस महकमे में अफसरों के खिलाफ आक्रोश है। सोशल साइट पर पुलिस वालों ने सत्ताधारी नेताओं और नेताओं के खिलाफ खराब मैसेज पोस्ट किए।
केस : दो
गाजियाबाद में भाजपा विधायक के करीबी का चालान काटने पर इंस्पेक्टर समेत तीन पुलिस वालों को निलंबित कर दूसरे जनपद में ट्रांसफर कर दिया गया। इसको लेकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ खुद पुलिस वालों ने फेसबुक पर पोस्ट डाली। एफबी पर पुलिस व नेताओं ने एक दूसरे पर कमेंट किए। कानून व्यवस्था को लेकर अफसरों में खलबली मची रही।
केस : तीन
दो अप्रैल को दलितों के बंद के दौरान मेरठ पुलिस ने कई लोगों को जेल भेज दिया। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे। जातीय संघर्ष फैलने लगा। सरधना, इंचौली, मवाना, किठौर समेत कई जगहों पर जातीय संघर्ष हुआ। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाने के लिए कई गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दी। पुलिस के साथ पीएसी और आरएएफ भी लगानी पड़ी। कानून व्यवस्था खराब न हो, इसको देखते आज भी सरधना, इंचौली में पुलिस तैनात है।
केस : चार
इंचौली के बिसौला गांव में दो संप्रदायों में हुए विवाद हुआ। दोनों तरफ से पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया। भाजपा सांसद, विधायक समेत कई नेता एक पक्ष के लोगों की तरफ से पैरवी करने लगे। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। नतीजा हुआ कि पुलिस ने एक मुकदमे में एफआर लगा दी। इसको लेकर एफबी पर पुलिस वालों के खिलाफ लोग मैसेज पोस्ट कर रहे हैं। तनाव की स्थिति बन रही है।
आगामी लोकसभा चुनाव को देखते पुलिस अलर्ट है। छोटे-छोटे मामलों को कुछ लोग तूल देने का प्रयास भी करते हैं। कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस सतर्क है। पुलिस वाले खिलाफ नहीं हैं। मेरठ जोन में क्राइम कंट्रोल है और कानून व्यवस्था भी बेहतर रखेंगे।
-प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
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