कई मामलों में सामने आता कि मुकदमा दर्ज होने या जेल जाने के बाद वह युवा अपने परिवार से भी नहीं डरता। छेड़छाड़, मारपीट और रंजिशन घटनाओं में परिजनों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वह युवाओं को सामने न लाएं। जो भी घटना हो उसकी सूचना पुलिस को दें। खुद कानून हाथ में लेने की कोशिश न करें।
केस -1
मवाना में एक किशोर का स्कूल में अपने दोस्त से विवाद हो गया। जिसके बाद किशोर ने घर पहुंचकर जानकारी दी। इसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए थी। लेकिन किशोर ने खुद तमंचे से गोली मार ली और दूसरे साथी का नाम बताया। जांच में सामने आया कि दोस्त को फंसाने के लिए ही खुद गलत कदम उठाया।
केस -2
दौराला के एक गांव में युवक अपने परिजनों से परेशान था। मां अपने बेटे के सामने पति को भुगतने की धमकी देती थी। कई बार यह भी कहा कि इसने घर को बर्बाद कर दिया। दो माह पूर्व युवक ने अपनी मां के साथ मिलकर पिता की चाकू से गोदकर हत्या कर दी।
केस -3
जागृति विहार निवासी युवती से छेड़छाड़ की घटना हुई। बेटी से छेड़छाड़ के बाद मां ने बेटे को ही बदला लेने के लिए कहा। जिसके बाद युवक ने मां के कहने पर आरोपी पर चाकू से हमला कर दिया था। जानलेवा हमले में युवक को जेल जाना पड़ा।
केस -4
परीक्षितगढ़ निवासी बीए के छात्र अंकुश का पड़ोस के युवकों से विवाद हुआ। जिसके बाद युवक बदला लेने के लिए रेकी करता रहा। युवक ने दोस्तों के साथ मिलकर पड़ोसी को गोली मार दी। छात्र को जेल जाना पड़ा। बाद में छात्र का अपने भाई से भी जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद हो गया।
छात्रों को सिखाई जाएगी नैतिकता
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक ने बताया कि 10वीं और 12वीं के छात्रों को उनके शिक्षकों के सामने पाठ पढ़ाया जाएगा कि किसी भी मामले में बदला लेने के लिए अपराध न करें। छोटी सी घटना से ही बड़ा अपराध पनपता है, जिसने जो घटना की है कार्रवाई के लिए पुलिस पर छोड़ देना चाहिए। अब किसी सूचना पर कंट्रोल रूम से रिकॉर्ड समय में यूपी 100 पुलिस मौके पर पहुंच रही है।
छात्रों से अपील की जाएगी कि वे भीड़ का हिस्सा भी न बनें, क्योंकि कुछ शरारती तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। अपराध की जिम्मेदारी तय होती है तो मौके पर मौजूद रहने वाले लोग भी जिम्मेदार होते हैं। स्कूल-कॉलेजों के अलावा शहर और देहात में प्रधान और पार्षदों की सहायता से जगह-जगह बैठक कर अभिभावकों से भी अपील की जाएगी कि वह अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें।