मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन सॉफ्टवेयर
- फोटो : अमर उजाला
मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन से सोशल मीडिया पर नजर
पुलिस ने विशेष टीम लगाकर मैट्रिक्स एक्सप्लोरेशन के जरिये दिन-रात सोशल मीडिया की निगरानी की। एआई आधारित यह सॉफ्टवेयर इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक, यूट्यूब, वेब न्यूज और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही भड़काऊ और फर्जी पोस्ट को तलाशने में मदद करता रहा। ताकि, माहौल बिगाड़ने की कोशिशों पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
गूगल मैप से जाम पर नजर, डीजे कंप्टीशन पर लगाम
कांवड़ यात्रा के दौरान बड़े डीजे वाले वाहनों और डीजे कंप्टीशन के कारण जाम की स्थिति चुनौती बनी रही। पुलिस अधिकारियों ने गूगल मैप के जरिये यातायात की स्थिति पर लगातार नजर रखी। जहां जाम की सूचना मिली, वहां तत्काल पुलिस बल भेजकर यातायात सुचारू कराया गया।
दूसरे जिलों से बड़े डीजे वाली कांवड़ आने की सूचना मिलते ही पुलिस अलर्ट हो गई और डीजे कंप्टीशन की स्थिति बनने नहीं दी। एक मौके पर इसे रोकने के लिए एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले खुद डीजे पर चढ़ गए थे।
360 डिग्री निगरानी और क्लोजअप दृश्य
कांवड़ मार्ग की निगरानी के लिए पीटीजेड नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल किया गया। ये कैमरे 360 डिग्री घूमकर आसपास के क्षेत्र पर नजर रखने के साथ दूर के दृश्यों को जूम कर करीब से देखने में सक्षम हैं। इनसे कंट्रोल रूम ही नहीं, बल्कि अधिकारी अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी क्षेत्र की निगरानी कर सकते थे।
वहीं, आईपी कैमरों के जरिये इंटरनेट या स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से वीडियो और ऑडियो डेटा प्राप्त किया गया। इससे संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की निगरानी और प्रभावी हुई।
यह भी पढ़ें: बागपत डबल मर्डर: पहले नशीली चाय पिलाई, फिर जहर के इंजेक्शन लगाए, तीन लोगों ने गड्ढे खोदकर जिंदा ही दबाया
अब स्वतंत्रता दिवस पर भी डिजिटल पहरा
कांवड़ यात्रा के दौरान तकनीक के इस्तेमाल से मिले अनुभव के बाद पुलिस अब स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा व्यवस्था में भी इसी मॉडल को आगे बढ़ा रही है। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, सीसीटीवी और पीटीजेड कैमरे, ड्रोन तथा संदिग्धों के डिजिटल सत्यापन जैसे संसाधनों के जरिये सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। यानी अब पुलिस की नजर सिर्फ सड़क और चौराहों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दौर में शातिरों की हर चाल पर तकनीक का पहरा बिछा दिया गया है।