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कमांडो को जेल भेजने में पुलिस की गर्दन फंसी, सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक पर गिर सकती है गाज

Tue, 27 Aug 2019 03:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीआरपीएफ कमांडो की पत्नी - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में सीआरपीएफ के कमांडो सतेंद्र सिंह को थर्ड डिग्री देने और तीन मुदकमे दर्ज कर जेल भेजने के मामले में मेडिकल पुलिस की गर्दन फंसने लगी है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. संदीप पहल ने सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए एसएसपी को शिकायती पत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजा है। मुकदमा न होने पर न्यायालय के आदेश से मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है।

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डॉ. पहल का आरोप है कि कमांडो सतेंद्र सिंह से के ब्लॉक चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार, निलंबित दरोगा सुनील कुमार, एसएसआई पिंकी देशवाल, इंस्पेक्टर प्रशांत मिश्रा, सिपाही सुमित गंगवार व आदेश ने मारपीट की और घर में तोड़फोड़ की। कमांडो की पत्नी, बेटे और माता को भी पीटा। 
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घटना वाली 21 अगस्त की रात 11.24 बजे डिलीवरी ब्वॉय विवेक की लूट की तहरीर को इंस्पेक्टर मेडिकल ने महज आठ मिनट में पढकर पुलिस की रवानगी कराई। मौके पर जांच पड़ताल कर मोबाइल बरामद कर 11.32 बजे कंप्यूटर पर मुकदमा दर्ज हो गया। दूसरा मुकदमा रात्रि डेढ़ बजे और तीसरा मुकदमा भी उसके बाद दर्ज हुआ। आठ मिनट में पुलिस ने कमांडो के खिलाफ साजिशन मुकदमा दर्ज कर मोबाइल बरामद कर लिया।

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एफआईआर में वादी विवेक का पता गलत लिखा गया है, जबकि वह दरोगा सुनील व जितेंद्र के कमरे पर रहता है। तथाकथित मेडिकल जांच पर कमांडो के हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान नहीं हैं। जबकि कोर्ट के आदेश पर सतेंद्र कमांडो का जेल में मेडिकल कराया गया। 

जेल के मेडिकल में कमांडो के शरीर पर चोट के निशान आए, जबकि मेडिकल कॉलेज में कोई चोट का निशान नहीं बताया गया। सवाल है कि लूट का मोबाइल जब मिला तो उसके बाद लूट की धारा क्यों लगाई। फिर पुलिस ने दबाव में धारा क्यों हटाई। एक जवान को लॉकअप में क्यों रखा गया, जिसका फोटो भी वायरल हुआ। एसएसपी से आरोपी इंस्पेक्टर, दरोगा व सिपाहियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की है।
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