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मोबाइल नंबर के जरिए बैंक खाते पर कब्जा कर लेता था टटलू गैंग, ठगी के लिए निकाला नया तरीका

Sun, 12 May 2019 11:18 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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ऑनलाइन ठगी के आरोपियों का खुलासा करते एसएसपी नितिन तिवारी - फोटो : अमर उजाला
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1.17 करोड़ की ऑनलाइन ठगी के मामले में  मेरठ में सदर पुलिस और साइबर सेल ने शनिवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों से अलग-अलग बैंकों की कई चेकबुक, एटीएम कार्ड बरामद हुए। आरोपियों ने आठ माह पहले एक निजी कंपनी के खाते से जुड़े मोबाइल नंबर को हैक करके ठगी को अंजाम दिया था।

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एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि 1.17 करोड़ की ठगी के मामले में गिरफ्तार गौरव व नितिन ने साइबर अपराध के बारे में बताया कि अब सब ऑनलाइन है। बैंक खाते में आधार कार्ड व मोबाइल नंबर अटैच है। बैंक की जानकारी ई-मेल या फिर एसएमएस के जरिये मोबाइल पर आती है, जिस पर साइबर अपराधियों की नजर होती है। खाता नंबर जानने और उसमें से पैसा निकालने का साइबर अपराधियों ने नया तरीका निकाला है।

खाताधारक का रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जुटाकर कंपनी में खराब या गुम होने की जानकारी देकर नया सिम लेते हैं। इस बीच जब तक खाताधारक अपने नंबर बंद होने की शिकायत कर दूसरा डुप्लीकेट सिम निकलवाता है, उसके बैंक की सारी डिटेल दूसरे हाथों में चली जाती है। कई मामलों में तो उसी दिन ही ओटीपी नंबर लेकर खाते से पैसा निकाल लेते हैं।
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नंबर हैक, फर्जी खाता
एसएसपी के अनुसार साइबर अपराधी किसी भी नंबर को हैक कर लेते हैं। यही नहीं, साइबर अपराधी फर्जी खाता तक भी खुलवा लेते हैं। जिसमें अपना नंबर लिखवा देते है। जिसके जरिये अकाउंट की सारी डिटेल आपके मोबाइल पर ऑनलाइन आने लगती है। उसके बाद साइबर अपराधी मोबाइल में आने वाली डिटेल के जरिये खाते में आने वाले पैसे को निकाल लेता है। इसके बैंक व मोबाइल कंपनी की भी भूमिका बताई जा रही है। 

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बैंक की भूमिका पर उठ रहे सवाल
एसएसपी ने बताया कि 1.17 करोड़ की ठगी के मामले में बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित प्रवीण कुमार ने मोबाइल नंबर हैक होने की सूचना पुलिस और बैंक को दी थी। अंदेशा जताया था कि उनके खाते से धोखाधड़ी हो सकती है। इसके बावजूद भी बैंक अधिकारी अलर्ट नहीं हुए और साइबर अपराधियों ने उनके खाते से 1.17 करोड़ रुपये निकाल लिए। 

तुरंत करें शिकायत 
एसएसपी ने अपील की है कि साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। बैंक खाते से जुड़ी कोई सूचना किसी को फोन पर न दें। मोबाइल नंबर हैक होने या कोई मेसेज आने पर तुरंत पुलिस व बैंक अधिकारियों को सूचित करें। मोबाइल खराब होने या फिर मोबाइल को सर्विस पर देने से पहले बैंक से जुड़ीं जानकारियों को दूसरे मोबाइल में फारवर्ड कर लें। 

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