सरधना में तहसील रोड स्थित एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर हरियाणा और मेरठ स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रूण लिंग परीक्षण के अवैध धंधे का भंडाफोड़ किया है। एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान 14,500 रुपये लेकर भ्रूण का लिंग बताने का आरोप सही पाए जाने पर सेंटर के दो संचालकों को हिरासत में लिया गया है। अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया गया है और सभी संबंधित रिकॉर्ड को कब्जे में ले लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा की पीसीपीएनडीटी (प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स) टीम ने पूर्व नियोजित तरीके से एक गर्भवती महिला को ग्राहक बनाकर इस डायग्नोस्टिक सेंटर पर भेजा। आरोप है कि सेंटर के संचालकों ने निर्धारित राशि लेकर भ्रूण का लिंग बताने की सहमति दी। जैसे ही यह पुष्टि हुई, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर छापा मार दिया। इस दौरान मेरठ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रही, जिसमें एसीएमओ डॉ. सुधीर भी शामिल थे।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने सेंटर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, रजिस्टर व अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच की और उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
कानूनी कार्रवाई और संभावित दंड
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस अधिनियम के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण करना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए दोषी पाए जाने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान है। इस तरह के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है।
क्षेत्र में हड़कंप
इस छापेमारी की खबर फैलते ही सरधना क्षेत्र में हड़कंप मच गया। डायग्नोस्टिक सेंटर के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई, जो इस अवैध कारोबार के खुलासे से आश्चर्यचकित थे। यह घटना समाज में लिंगानुपात को लेकर चिंता को और गहरा करती है और ऐसे अवैध कार्यों के प्रति सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देती है।
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