इसके बाद महिला जिला अस्पताल चले जाते हैं, वहां दो बजे तक जांच करते हैं। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है। पहले तो अल्ट्रासाउंड के लिए दो से तीन माह की तारीख दी जाती थी। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची तो तारीख देनी तो बंद हो गई, लेकिन अब टोकन दिए जाने लगे। 20 से 25 लोगों को टोकन नंबर दिए जाते हैं।
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इसके बाद वालों का अल्ट्रासाउंड नहीं होता है, उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा जाता है। जरूरी नहीं कि अगले दिन भी उनका नंबर आ जाए, क्योंकि फिर इतने ही लोगों की जांच लिखी जाती है। दोनों अस्पताल में हर रोज 150 से 200 अल्ट्रासाउंड लिखे जाते हैं। हालांकि जिला अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो गई है, लेकिन अभी तक उन्होंने ज्वॉइन नहीं किया है।
जांच के रेट
जांच जिला व महिला अस्पताल निजी लैब या अस्पताल में
अल्ट्रासाउंड मुफ्त 800-1000 रुपये
डिजिटल एक्सरे मुफ्त 250-600 रुपये
सीटी स्कैन मुफ्त 1500-10,000 रुपये
जांच जितनी जल्दी हो, उतनी बेहतर
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा का कहना है कि लिवर, गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) या फिर ट्यूमर आदि की जांच और इलाज सही समय पर न हो तो यह मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। जांच तो जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर है।
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रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद हैं खाली
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद और महिला जिला अस्पताल में दो पद खाली हैं। डॉ. संजीव त्यागी की भी महिला जिला अस्पताल में मूल तैनाती है, जिला अस्पताल में वह अटैच हैं। पूरे प्रदेश में ही रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, जिस कारण यह दिक्कत आ रही है।