अब यह होगा
महानगर में तीन जगहों पर स्थायी रूप से ऑनलाइन पॉल्यूशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इनमें एक सिस्टम गढ़ रोड पर राधा गोविंद शिक्षण संस्थान के पास, दूसरा सिस्टम मोदीपुरम में पल्लवपुरम फेस-2 स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय में और तीसरा सिस्टम मवाना रोड पर गंगानगर में चयनित किया गया है। मैनुअल सिस्टम भी जारी रहेगा। बोर्ड के अनुसार एनसीआर में नोएडा और गाजियाबाद के बाद मेरठ में भी तीन जगह ही ये सिस्टम लगेंगे।
यह होगा फायदा
इन सिस्टम से शहर के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) का तुरंत पता चल सकेगा। यह सिस्टम आसपास के क्षेत्र को भी कवर करेगा। आसपास कहीं भी यदि कूड़ा जलाया जाएगा, हवा में घुलने वाले खतरनाक सूक्ष्म कण बढ़ेंगे या औद्योगिक कारणों से वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा तो यह सिस्टम तुरंत सचेत कर देगा। सीपीसीबी द्वारा प्रदूषण के कारणों को जानने के बाद इसे कम करने के लिए योजना पर काम किया जाएगा। लोगों को जागरूक किया जाएगा।
इनका स्तर बताएगा सिस्टम
- पीएम 2.5 का लेवल कितना है और कितना बढ़ रहा है, पीएम 10 का लेवल कितना है और कितना बढ़ रहा है
- सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा कितनी है
- नाइट्रोजन आक्साइड की मात्रा कितनी है
- ओजोन किस मानक में है
- बैंजीन (केमिकल) का स्तर क्या है
- कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा कितनी है
इसलिए पड़ी जरूरत
एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के बाद मेरठ में भी हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है। एनसीआर में इस बार मेरठ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सबसे ज्यादा बिगड़ा रहा था। नवंबर माह में तो एक्यूआई 500 के पार पहुंच गया था। विशेषज्ञों के अनुसार एनसीआर में अमूमन अक्तूबर और नवंबर माह में हालात ज्यादा खराब हो जाते हैं। वहीं, सर्दी के सीजन में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
यह सिस्टम बहुत जरूरी
एयर क्वालिटी इंडेक्स तुरंत जानने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम बहुत जरूरी है। अभी मैनुअल सिस्टम से ही काम किया जा रहा है। शहर में तीन जगह सिस्टम लगने से वायु प्रदूषण का डाटा ऑनलाइन पता चलेगा और उस पर काम होगा।
- आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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