फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut: गोवर्धन पर्व पर शुभ संयोग में होगी पूजा, लगाए जाएंगे 56 प्रकार के भोग, होगा प्रसाद वितरण

Mon, 13 Nov 2023 09:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

गोवर्धन पर्व पर मंगलवार को शुभ संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाएगी। शहर के विभिन्न मंदिरों, घरों और अन्य स्थलों पर 56 प्रकार के भोग लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
गोवर्धन पूजा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गोवर्धन पर्व पर मंगलवार को शुभ संयोग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाएगी। शहर के विभिन्न मंदिरों, घरों और अन्य स्थलों पर 56 प्रकार के भोग लगाए जाएंगे। प्रसाद का वितरण लगाया जाएगा। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है।
विज्ञापन


इस दिन महिलाएं अपने घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाती हैं और पूजा करती हैं। देश के कुछ हिस्सों में इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। भगवान कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा के दौरान कई तरह के पकवानों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इन पकवानों को ही ''अन्नकूट'' कहते हैं।

शोभन योग में गोवर्धन पूजा
शोभन योग और अनुराधा नक्षत्र में पूजा होगी। शोभन योग प्रात:काल से दोपहर 01:57 बजे तक है। इसके बाद से अतिगंड योग शुरू हो जाएगा। शोभन योग शुभ योग माना जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन सुबह से ही अनुराधा नक्षत्र होगा।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: Deoband: मौलाना मदनी बोले-दूसरी जाति में शादी नहीं करते हिंदू तो मुस्लिम लड़कियों को क्यों बनाया जा रहा निशाना
 
विज्ञापन

गोवर्धन से की थी बृजवासियों की रक्षा
ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से विशाल गोवर्धन पर्वत को छोटी उंगली में उठाकर हजारों जीव-जतुंओं और इंसानी जिंदगियों को भगवान इंद्र के कोप से बचाया था। श्रीकृष्ण ने इंद्र के घमंड को चूर कर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। इस दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाते हैं। कुछ लोग गाय के गोबर से गोवर्धन का पर्वत मनाकर उसे पूजते हैं।

गोवर्धन पूजन मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - 11:43 से 12:26 बजे तक
विशेष मुहूर्त - शाम 7:43 से 8:52 बजे तक

ऐसे करें पूजन
सुबह ठकर स्नानादि करें। फिर शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और साथ ही पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं। इसके बाद धूप-दीप से विधिवत पूजा करें। भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद पूजन करें। इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाएं और आरती करके चार परिक्रमा करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें