की जा रही गोल्डन कार्ड बनाए जाने की अपील
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग लगातार लाभार्थियों से अपील करता है कि सभी आयुष्मान कार्ड जरूर बनवा लें। आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डा. आर के सिरोहा ने बताया कि योजना का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच सके, इसके लिए विभाग निगरानी करता है। सभी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को सख्त निर्देश हैं कि अस्पताल में आने वाले लाभार्थियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएं।
दर-साल
साल गोल्डन कार्ड बने
2018-19 1,36,936
2020-21 68,680
2021-22 44,678
2022-23 1,49,706
2023-24 51,256
लाभार्थियों के योजना है वरदान
अगर योजना पूरी तरह से परवान चढ़ जाए तो यह आर्थिक तौर पर कमजोर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। जो लाभ ले पा रहे हैं, वे बहुत खुश हैं। मेरठ निवासी आस मोहम्मद को दिल की बीमारी थी। उनके दिल में दो ब्लॉकेज थे। उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह दिल की बीमार के इलाज का खर्च उठा पाते। वह आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं और उनके पास आय़ुष्मान कार्ड है। ऐसे में उन्होंने एक निजी अस्पताल में उपचार कराया, जिसमें 3.1 लाख का खर्च आया।
आयुष्मान कार्ड के चलते उनके उपचार का पूरा खर्च सरकार ने उठाया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर निवासी रीटा को भी आयुष्मान कार्ड की बदौलत जिंदगी मिली। वह दिल की मरीज हैं। दिल की दिक्कत होने पर चिकित्सकों ने उन्हें मेरठ रेफर कर दिया। उन्होंने सीएमओ कार्यालय में संपर्क किया, जिस पर उन्हें एक निजी अस्पताल भेजा गया। वहां उनके दिल में स्टेंट डाला गया। इलाज में करीब 1.4 लाख का खर्च आया, जिसे सरकार ने वहन किया।