महापंचायत किसानों के नाम पर बुलाई गई थी। प्रशासन से भी यह बात कही गई थी कि पंचायत में राजनीति नहीं होगी, लेकिन माइक पर आते ही सियासत जोर भरने लगी और किसानों के नाम पर बुलाई गई पंचायत राजनीतिक होने से नहीं बच सकी। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने किसान पंचायत की जमीन पर राजनीति का खूब हल चलाया और रालोद की खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से हरा-भरा करने की कोशिश की।
अन्य वक्ता और खाप चौधरी बार-बार दोहरा रहे थे कि पंचायत भैंसवाल गांव ने बुलाई है और यह किसानों की पंचायत है लेकिन जयंत चौधरी ने माइक संभालते ही साफ कर दिया कि पंचायत रालोद के आह्वान पर बुलाई गई है। उन्होंने सीधा हमला प्रदेश की सत्ता पर किया। युवाओं के मूड को भांपते हुए योगी पर भी टिप्पणी की और उनसे आह्वान भी किया कि इस गूंज को बनाए रखना।
पंचायत की अनुमति नहीं दी गई लेकिन पंचायत फिर भी हुई। अब जो धारा लगानी है, लगा लो। उन्होंने यह भी कहा कि तिरंगा तो किसानों ने थाम लिया है, अब भाजपा नेताओं को दूसरा झंडा थामना होगा। बार-बार युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें यह संदेश भी दिया कि पिछले चुनाव में भटक गए थे, आगे नहीं भटकना है।
चौधरी चरण सिंह, छोटूराम और चौधरी अजित सिंह का जिक्र कर पुराने रालोद नेताओं को बांधे रखने की कोशिश की। उन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर जुटे लोगों को साधते हुए भी कहा कि सभी का साथ मिल रहा है। किसान संगठन और सामाजिक संगठन साथ हैं, लेकिन निर्णय तो राजनीति से ही होगा।
उनसे पहले पूर्व सांसद अमीर आलम ने कहा कि रालोद को इस मुकाम पर पहुंचा दो कि आने वाले चुनाव में जो भी पार्टी गठबंधन करे वह रालोद की शर्तों पर हो। रालोद नेता अशरफ अली ने जयंत को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही, जबकि पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने मंच से अबकी बार, जयंत सरकार का नारा दिया।
केवल किसानों की बात करने के लिए कहते रहे खाप चौधरी
महापंचायत में शामिल हुए खाप चौधरी केवल किसानों की बात कहने के लिए टोकते रहे, लेकिन राजनीति नहीं रुकी। थांबेदार श्याम सिंह बहावड़ी ने बीच में टोका भी कि पंचायत में केवल किसानों की बात कही जाए। राजनीति पर बात नहीं होनी चाहिए। थांबेदार रविंद्र लांक ने भी किसानों की बात पर जोर दिया, जबकि कालखंडे खाप के चौधरी संजय कालखंडे ने कहा कि भाईचारा पहले है। राजनीति आती-जाती रहेगी। भाजपा का कोई भी एमपी या एमएलए किसान की बात सदन में नहीं उठाता। चाय बेचने वाले को इसलिए प्रधानमंत्री बनाया था कि वह गरीब का दर्द समझेगा, लेकिन उसे भी कोई परवाह नहीं है।
बाबा सूरजमल ने किया एकजुटता का आह्वान
महापंचायत की अध्यक्षता कर रहे बाबा सूरजमल ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सभी से एकजुट होने को कहा। उन्होंने कहा कि जो किसानों के साथ खड़ा है उसका ध्यान आगे भी रखना।