केस एक
सोफिया गर्ल्स स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ने वाली वान्या स्कूल जाने की बात सोचकर परेशान है। वह कहती हैं कि स्कूल के लिए अब फिर से सुबह जल्दी उठना होगा। पिछले छह महीने से ऑनलाइन पढ़ाई के कारण देर तक सोने को मिलता था। न जल्दी उठने की चिंता थी और न ही जल्दी तैयार होकर स्कूल भागने की। वान्या अपने मम्मी पापा से बार-बार कहती हैं कि मुझे स्कूल नहीं जाना।
केस दो
दीवान स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले चिराग ने भी जब से दोबारा स्कूल खुलने की बात सुनी है उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा।। उसका कहना है कि अभी मजे से चल रहा था। ऑनलाइन क्लास होती थी, लेकिन अब फिर सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर नहाना, जल्दी-जल्दी बस स्टॉप की ओर दौड़ना और स्कूल जाना पड़ेगा।
लंच लेकर स्कूल नहीं जाएंगे छात्र
सीजेडीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल शास्त्रीनगर में जल्द स्कूल खोलने की तैयारी हो रही है। सरकार के सभी नियमों का पालन स्कूल में होगा। पहले दसवीं, बारहवीं की कक्षाएं शुरू होंगी। बाद में नवीं व ग्याहरवीं की कक्षाएं होंगी। अलग-अलग दिन विकल्प के अनुसार छात्र विद्यालय आएंगे। उनकी परेशानी का हल किया जाए।
प्रिंसिपल डॉ. अल्पना शर्मा ने बताया कि छात्र यूनिफार्म में ही स्कूल आएंगे। 99 डिग्री से अधिक तापमान पर छात्र, शिक्षक किसी को भी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। गेट पर ही तापमान किया जाएगा। छात्र लंच लेकर नहीं आएंगे, न ही प्रार्थना होगी। गेट खोलने के लिए टिशू की व्यवस्था विद्यालय में रहेगी। छात्र पानी की बोतल साथ लाएंगे। संगीत, नृत्य, खेल व पुस्तकालय की सुविधा नहीं रहेगी, न इनकी कक्षाएं होंगी।
परीक्षा कराने पर हुआ प्रिंसिपल संवाद
सीबीएसई के सिटी कोआर्डिनेटर सुधांशु शेखर द्वारा शनिवार को वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में शहर के विभिन्न पब्लिक स्कूलों के प्रिंसिपल ने भाग लिया। वेबिनार में कोरोना काल में 2020-21 की परीक्षाओं के प्रारूप पर विचार विमर्श हुआ।
परीक्षाओं का प्रारूप कैसा होगा, सुरक्षित ढंग से कैसे पेपर होंगे। परीक्षा में कितना पाठ्यक्रम आएगा इन बिंदुओं पर वार्तालाप हुआ। सीबीएसई के चेयरमैन की ओर से सभी सिटी कोआर्डिनेटर्स से परीक्षा संबंधी सुझाव मांगे गए हैं। इस वेबिनार में इसी पर चर्चा हुई।
बहाने बना रहे बच्चे
लॉकडाउन एक तरह से अवकाश अवधि थी। जिसने बच्चों की दिनचर्या को बदला है। हालांकि स्कूलों ने प्रयास किया कि ऑनलाइन क्लास में स्कूल का माहौल दे सकें, मगर यह पूरी तरह संभव नहीं हुआ। इसलिए अब बच्चे आलसी हो गए हैं। स्कूल खुलेंगे तो उनके आराम मेें मुश्किल होगी, इसलिए वो स्कूल जाने से बचने के लिए बहाने खोज रहे हैं। - डॉ. पूनम देवदत्त, सीबीएसई काउंसलर
बदलनी होगी दिनचर्या
बच्चों को दोबारा से उसी दिनचर्या पर लाना होगा। सुबह उठना, तैयार होकर स्कूल जाना। छह महीने के अंतराल में जो छूटा है उसे फिर से उनकी आदत में शामिल करना होगा। इसीलिए अभी से अभिभावक बच्चों को उसी दिनचर्या में ढालना शुरू करें। उसी टाइमटेबल को अपनाएं, ताकि जब स्कूल खुले तो बच्चा घबराए नहीं। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक