10 मई 1857 को मेरठ छावनी में क्रांति की ज्वाला यूं ही नहीं भड़की थी। मंदिर के पुजारी ने भारतीय सैनिकों के आत्मसम्मान को ललकारा था। हिंदू-मुस्लिम सैनिकों की आत्मा को झकझोरा था, तब जाकर क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित हुई थी। जिस एतिहासिक कुएं पर सैनिकों ने अंग्रेजों को मार गिराने की कसम खाई थी, उसी कुएं पर बने शहीद स्मारक पर सोमवार को शहीद क्रांतिकारियों को नमन किया जाएगा। लोगों को ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा गया है।