54 लाख रुपये प्रतिदिन का बढ़ा बोझ
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रत्येक बस के रोजाना 300 किलोमीटर चलती है। प्रति बस डीजल औसत 5.30 किलोमीटर प्रति लीटर बैठता है। इस हिसाब से विभाग में रोजाना 4.50 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। इतने डीजल पर डिस्काउंट खत्म होने और मार्केट रेट से भी महंगा मिलने से कुल 12 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। इस हिसाब से हर रोज 54 लाख रुपये का बोझ पड़ रहा है।
मेरठ क्षेत्र पर भी बढ़ा बोझ
मेरठ रोडवेज रीजन की बात करें तो यहां 396 बसों का बेड़ा है। प्रति बस 310 किलोमीटर संचालन के हिसाब से रोजाना 122760 किलोमीटर का सफर तय करती है। 5.30 किलोमीटर प्रति बस डीजल औसत के हिसाब से 23162 लीटर डीजल की रोजाना खपत होती है। अचानक 12 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हुए डीजल के हिसाब से रीजन को 277947 रुपये को बोझ उठाना पड़ रहा है।
तेल कंपनियों द्वारा विभाग को डीजल पर मिल रहा डिस्काउंट बंद करते हुए मार्केट रेट से महंगा डीजल दिया जा रहा है। इसके लिए मुख्यालय को अवगत कराकर दिशा-निर्देश मांगे गए है। वहां से जो भी निर्देश मिलेंगे उसका पालन किया जाएगा। -केके शर्मा, आरएम रोडवेज
सात दिन में 3.78 करोड़ का नुकसान
गत 16 फरवरी से विभाग को महंगा डीजल मिल रहा है। इसके चलते विभाग को पिछले सात दिन में 3.78 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
वर्ष 2012 की राह पर चल सकता है परिवहन निगम
वर्ष 2012 में भी रोडवेज के सामने ऐसी स्थिति आई थी। उस समय विभाग के तत्कालीन एमडी आलोक कुमार ने मार्केट से डीजल खरीदने के आदेश दिए थे। विभाग ने करीब एक साल तक पेट्रोल पंपों से ही मार्केट रेट पर डीजल खरीदा था। बाद में समझौता होने के बाद सीधे तेल कंपनियों से आपूर्ति लेनी शुरू कर दी थी। इस बार भी वही स्थिति आ गई है। अधिकारियों ने इसके लिए एमडी आरपी सिंह से दिशा-निर्देश मांगे हैं।