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उम्र 65 पार, फिर भी संविदा बरकरार

Thu, 11 Feb 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सेवानिवृत्त होने के बाद भी विद्युत अधिकारी पीवीवीएनएल को छोड़ना नहीं चाहते हैं। 65 साल की प्रतिबंधित समय सीमा खत्म होने के बाद भी आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारी संविदा पर बरकरार हैं। इन सभी साहबों के मानदेय पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। सेटिंग-गेटिंग के फार्मूले से अधिकारी न केवल नियम विरुद्ध डेरा डाले बैठे हैं, बल्कि कई अधिकारी संविदा पर भी उसी पटल पर बेरोकटोक काम कर रहे हैं जिससे वे रिटायर हुए हैं।
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अधिकारियों की कमी के चलते यूपीपीसीएल ने प्रदेश के सभी डिस्कॉम को संविदा पर रिटायर अधिकारियों को रखने की छूट दे रखी है। लेकिन 65 साल की उम्र तक ही इन्हें संविदा पर रखा जा सकता है। उम्र पूरी होने पर इन्हें संविदा पर नहीं रखा जा सकता है। लेकिन पीवीवीएनएल के ऊर्जा भवन में ही इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऊर्जा लेखा, शिकायत प्रकोष्ठ, लेखा विभाग और एमडी के स्टाफ ऑफिसर ऑफिस में आधा दर्जन ऐसे अधिकारी संविदा पर जमे हैं, जिनकी उम्र्र 65 साल हो चुकी है।

लखनऊ तक जुगाड़ के चलते इन अधिकारियों पर कोई हाथ भी नहीं डाल पा रहा है। इसके अलावा कई अधिकारी ऐसे भी है जो नियम विरुद्ध उन्हीं पटल पर काम कर रहे हैं जहां से वे रिटायर हुए हैं। लेखा विभाग में तो कई संविदा कर्मी न केवल एमबी करते हैं, बल्कि चेक तक पर साइन कर रहे हैं। विभाग में इन अधिकारियों के बारे में चर्चा तो सब करते हैं, लेकिन शिकायत की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता है।
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मानदेय भी ठीकठाक ले रहे
संविदा पर लगे अधिकारी हर महीने 28 हजार रुपये से लेकर 38 हजार रुपये तक का मानदेय पा रहे हैं। अवर अभियंता स्तर के अधिकारी को 28 हजार और एसडीओ स्तर के अधिकारी 38 हजार रुपये मिल रहे हैं।

रिटायर होते ही लग जाते हैं संविदा के जुगाड़ में
रिटायर होने के बाद अधिकारी संविदा के जुगाड़ में लग जाते हैं। ऐसे कई अधिकारी जुगाड़ के बल पर ही संविदा पर जमे हैं, जिन्होंने नौकरी में रहते हुए भी विभाग का कोई भला नहीं किया था।
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