केंद्र सरकार के आगामी बजट पर मेरठी उद्यमी टकटकी लगाए बैठे हैं। उद्यमियों को भरोसा है कि केंद्र सरकार का पिटारा इस बार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए जरूर खुलेगा।
इसी उम्मीद से मेरठ के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यूपी ने वित्तमंत्री अरुण जेटली को अपना मांगपत्र भेजा है। इन उद्यमी संस्थाओं ने एमएसएमई को एग्रीकल्चर की तरह अलग सेक्टर बनाकर आयकर में छूट की मांग प्रमुखता से उठाई है।
ये है प्रमुख मांगें
आयकर की न्यूनतम सीमा 5 लाख की जाए।
प्रोफेशनल व्यवसायी के अनिवार्य रूप से एकाउंट रखने की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख की जाए।
आयकर में ऑडिट की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ हो।
स्मॉल ट्रेडर्स एवं स्मॉल इंडस्ट्री के स्क्रूटनी में उत्पीड़न न किया जाए।
व्यापारियों व उद्यमियों के लिए आयकर में ट्रस्ट के नियम-उपनियम को और सरल बनाना चाहिए, ताकि उद्योग ट्रस्ट के रूप में अधिक पनप सकें।
लघु उद्योगों के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट की सीमा डेढ़ करोड़ से बढ़ाकर 3 करोड़ की जाए।
सर्विस टैक्स में छूट सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख कर देनी चाहिए।
सीएसटी के आधीन फॉर्म-सी भरने का प्राविधान तिमाही है, इसको वार्षिक किया जाए।
मेरठ दिल्ली रैपिड रेल प्रोजेक्ट पहले से ही स्वीकृत है, इसको गति दी जाए।
गृह ऋण की किश्त और ब्याज को कर मुक्ति की सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख व मूल किस्त की रकम 80 सी में बढ़ाकर छूट लाभ को दो लाख में समायोजित किया जाए।
लेबर लॉ को आसान बनाते हुए स्मॉल फैक्ट्री बिल लागू हो, जिसमें सभी जटिलताओं को दूर कर दिया जाए।
एमएसएमई को मिनिमम आल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से मुक्त किया जाए