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खेलते समय नाले में समाया बालक

Sun, 31 Jan 2016 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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नेहरूनगर के नाले में एक बालक खेलते समय समा गया। बेटे के डूबने पर मां और परिवार का बुरा हाल था। मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, पुलिस-प्रशासनिक अफसर और लोगों की भीड़ लग गई। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी और निगम कर्मियों की टीम देर रात तक सर्च अभियान में जुटी थी।
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फूलबाग कालोनी स्थित गली नंबर पांच मकान नंबर 102 में सुशीला पत्नी मनमोहन अपने बेटे गौरव (12) और बेटी मिष्टी (5) समेत पिता अंतराम के साथ रहती हैं। शनिवार सुबह करीब 11 बजे गौरव खाना खाकर घर से बाहर खेलने गया था। खेलते-खेलते वह नेहरूनगर से गुजर रहे नाले की पुलिया नंबर दो पर पहुंच गया। यहां पर दस साल का एक बच्चा सोनू भी खेल रहा था।

सोनू ने बताया कि गौरव पुलिया पर बैठकर नाले में पत्थर फेंकने लगा। तभी अचानक वह नाले में गिर गया। बचने के लिए गौरव ने हाथ-पैर फेंके और शोर मचाया, लेकिन किसी ने उसकी पुकार नहीं सुनी। देखते ही देखते गौरव डूब गया। सोनू ने नाले की पुलिया से गुजर रहे दो-तीन लोगों को गौरव के डूबने की जानकारी दी, लेकिन वे अनसुना कर निकल गए। सोनू दौड़कर गौरव के घर पहुंचा और परिजनों को जानकारी दी।
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गौरव की मां सुशीला बेटे के नाले में डूबने की खबर पाकर दहाड़े मारकर रोने लगी। साथ ही अपने पिता और भाई को घटना की जानकारी दी। सभी लोग थोड़ी देर में नाले पर पहुंच गए। सूचना पर डेरा सच्चा सौदा के करीब 50 लोग भी नाले पर पहुंच गए। नगर निगम के सफाई कर्मचारी और अधिकारी के आने से पहले ही डेरा सच्चा सौदा के लोगों ने नाले में उतरकर सर्च अभियान शुरू कर दिया।

इसी दौरान पार्षद पति मनोज वर्मा, नगर निगम के चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, अधिशासी अभियंता मोइनुद्दीन, सहायक अभियंता, सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, पार्षद किशन कन्हैया, हरीश कुमार, राजकुमार मुन्ना, चैतन्यदेव स्वामी, सीएफओ आईएस सोनी, इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा आदि पहुंच गए। निगम कर्मियों ने जेसीबी से नाले में सर्च अभियान चलाया, लेकिन शाम तक गौरव का पता नहीं चल सका था।

मेरे दिल का टुकड़ा था गौरव
गौरव के डूबने पर मां सुशीला का बुरा हाल था। वह बार-बार बेहोश हो रही थीं। जब भी होश में आतीं, यही पूछतीं कि मेरा बेटा कैसा है। सुशीला ने बुरी तरह बिलखते हुए कहा कि गौरव दिमाग से थोड़ा कमजोर था। उसके अन्य अंगों में भी विकलांगता थी। लेकिन वह मेरे दिल का टुकड़ा था। उसके साथ मैं बेहद खुश थी। वह अपनी छोटी बहन मिष्टी के साथ खेलता रहता था।

दुख भरी है सुशीला की कहानी
सुशीला की जिंदगी की कहानी बड़ी दुख भरी है। दो शादिया हुईं, लेकिन साथ किसी ने नहीं दिया। अब वह बेटे और बेटी को साथ लेकर अपने मायके फूलबाग कालोनी में रह रही थीं। परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी पिता और भाइयों के कंधों पर है। पिता रिक्शा चलाकर बच्चों का पेट पालता है। गौरव के डूबने पर नानी मनयोदन और नाना अंतराम का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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