पश्चिमी जोन को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए शनिवार को खाका खींचा गया। ईको टूरिज्म इन वेस्ट यूपी : प्रॉस्पेक्टस एंड चैलेंजेस विषय पर आयोजित वर्कशॉप में प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र ने जोन के अधिकारियों और कर्मचारियों से बात की।
समस्या जानी और सुझाव लिए। पर्यावरण और जोन के लिहाज से यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण रही। ईको टूरिज्म को लेकर जिस तरह प्लानिंग की जा रही है, अगर वह अमल में आई तो विदेशी सैलानी पश्चिम यूपी में घूमते नजर आएंगे।
सीसीएसयू के बृहस्पति भवन में आयोजित हुई कार्यशाला में प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र ने ईको टूरिज्म के लिए कहा प्रदेश सरकार इसको बढ़ावा देने के पक्ष में है। दिल्ली के नजदीक और वन्य संसाधनों से लैस होने की वजह से पश्चिमी जोन में ईको टूरिज्म के लिए अपार संभावनाएं हैं।
बस ध्यान रखने वाली बात यह है कि टूरिज्म के नाम पर इकोलॉजी से छेड़छाड़ न हो। उन्होंने जंगल से दूसरी अपेक्षाओं का जिक्र किया। आंकड़ों के जरिए बताया कि सूबे की 20 करोड़ जनता में से 1.57 करोड़ परिवार खाना बनाने के लिए लकड़ी पर निर्भर हैं। करीब साढ़े चार किलो लकड़ी रोज जलाते हैं। 76 लाख परिवार गोबर के कंडे का उपयोग करते हैं। हमें जलाने वाली लकड़ी की मांग कम करनी है।
ईको टूरिज्म बिना स्थानीय जनता के सहयोग के नहीं हो सकता। ओखला पक्षी विहार और सूरजपुर पार्क में अच्छा काम हो रहा है। ईको टूरिज्म के साथ शिक्षा भी दी जाए, तभी वह सफल होगा। मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन मुकेश कुमार ने कहा जोन की कई खासियत इसे अलग बनाती हैं।
सबसे पहले यह दिल्ली के पास है। धार्मिक पर्यटन है। मेरठ में हस्तिनापुर, हापुड़ में गढ़, मुजफ्फरनगर में शुक्रताल और सहारनपुर में शाकंभरी देवी धार्मिक स्थल पर काफी में संख्या श्रद्धालु जाते हैं। जोन के कई इलाके ऐतिहासिक हैं। समृद्ध लोग हैं और गंगा जमुना के दोआब का क्षेत्र है।
संसाधन बढ़ाने की जरूरत है। वर्कशॉप में सीसीएफ उत्तराखंड डॉ. कपिल जोशी, सीएफ मेरठ एसके अवस्थी, सीएफ सुनील चौधरी सहारनपुर, डीएफओ मेरठ मनीष मित्तल, डीएफओ सहारनपुर विजय सिंह, डीएफओ गाजियाबाद जोगा सिंह, एसडीओ शिवालिक वीके चौधरी, एसडीओ मेरठ संजीव कुमार आदि मौजूद रहे। उत्तराखंड और कर्नाटक से आए विशेषज्ञों ने भी अपने यहां चल रहे सफल कार्यों की जानकारी दी।
बंदर, नील गाय की उठी समस्या
वन रेंजर्स ने जो समस्याएं बताई उसमें सबसे अधिक जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान की थी। हस्तिनापुर के जंगल में बंदरों की संख्या काफी हो गई है। रेंजर ने कहा कि शहर से बंदर पकड़कर वहां छोड़े जा रहे हैं। काफी संख्या में हो गए हैं। नील गाय फसल का नुकसान करती हैं।
क्या है ईको टूरिज्म
यह इकोलॉजी टूरिज्म है। देश में हर साल करीब 80 से 90 लाख पर्यटक आते हैं। इनमें 15 प्रतिशत पर्यटक ईको टूरिज्म यानी प्रकृति से जुड़ी चीजें देखना आते हैं। ईको टूरिज्म की खास बात यह है कि प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ नहीं होती। उसे वैसा ही रखा जाता है।
ये होगा टूरिज्म का हिस्सा
पश्चिमी जोन टूरिज्म में सहारनपुर में शाकंभरी देवी वन क्षेत्र, मुजफ्फरनगर में शुक्रताल वन क्षेत्र, मेरठ में हस्तिनापुर वन क्षेत्र, हापुड़ में गढ़मुक्तेश्वर वन क्षेत्र, बुलंदशहर में नरोरा रामसर साईट, नोएडा में ओखला पक्षी विहार और सूरजपुर ईको पार्क को ईको टूरिज्म क्षेत्र में विकसित करने की तैयारी है।
नरोरा, सूरजपुर को चमकाएंगे : उमेंद्र
प्रमुख वन संरक्षक उमेंद्र ने कहा नरोरा साइट और सूरजपुर पार्क को चमकाने की तैयारी है। इस पर काफी काम हो चुका है। इटावा में लॉयन की ब्रीडिंग प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा यह कठिन काम है, लेकिन इस पर काम शुरू करना अच्छा संकेत हैं।