एफडीए ने जापानी कंपनी याकुल्ट के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी कर ली है। कंपनी के एक प्रोबायोटिक प्रोडक्ट (मिल्क प्रोडक्ट) की आई सैंपलिंग रिपोर्ट में एफडीए ने इस पर लिखे ‘डेली पीयो, हेल्दी जियो’ के दावे को खोखला बताने के साथ इसे पैकेजिंग नियमों का उल्लंघन करार दिया है। वाद दाखिल करने के आदेश मुख्यालय से मिले हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह के अनुसार एफडीए ने कुछ महीने पहले याकुल्ट द्वारा शहर में बेचे जा रहे प्रोबायोटिक प्रोडक्ट की सैंपलिंग की थी। अब जांच रिपोर्ट आई तो कई सारे खुलासे हुए हैं।
जिसके अनुसार ‘डेली पियो, हेल्दी जियो’ प्रोडक्ट की 65 एमएल की बोतल पर लिखा गया है कि इसके अंदर 6.5 बिलियन एलसीएस (प्रोबायोटिक बैक्टीरिया) हैं। जबकि कंपनी यह साबित नहीं कर सकती है कि क्या इतने बैक्टीरिया को एक सॉल्यूशन में लाना संभव है।
एफडीए ने माना है कि यह महज प्रोडक्ट को बेचने के लिए किया जा रहा है, जो पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। कंपनी गलत दावे कर रही है, जो रिपोर्ट में साबित हो गए हैं। अब सारे मामले में कंपनी के खिलाफ वाद दाखिल किया जाएगा।
क्या होता है प्रोबायोटिक प्रोडेक्ट
मेडिकल साइंस मानता है कि प्रोबायोटिक प्रोडक्ट का सेवन करने से शरीर की पाचन क्रिया अच्छी होती है। इसके साथ ही शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है। इसके लिए तमाम कंपनियां बाजार में प्रोबायोटिक प्रोडक्ट बेच रही हैं, जिसमें याकुल्ट का प्रोडक्ट भी एक है।
सरकारी कैंटीन के प्रोडक्ट भी फेल
कलक्ट्रेट स्थित उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निमग से भरे गए घी के सैंपल भी फेल हो गए। एफडीए ने श्रीकासी कुकिंग मीडियम व बाल गोपाल प्रोप्राइटरी फूड का सैंपल भरा था, जो फेल हो गए।
इन प्रोडक्ट्स में भी गोलमाल
पेस्ट्री - डेलेशियस बेकरी (शास्त्री नगर) - सिलवर पेपर की जगह एल्युमीनियम का इस्तेमाल
बंसरी पान - मग्धु ट्रेडिंग कंपनी (सोतीगंज) - सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल
चना मटर - ईजी डे (मंगल पांडे नगर) - मिस ब्रांड ( चस्पा किया गया लेबल सही नहीं)
हींग - हरी मोहनी बंधानी (शास्त्रीनगर) - हींग में मिलावट
मदर डेरी - मैंगो फ्लेवर मिल्क - 3 प्रतिशत की जगह 1.95 प्रतिशत पाया गया फैट
चमचम मिठाई- रामनाथ लड्डू वाले, सदर - सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल
रोल गजक व खस्ता रेवड़ी - रामचंद्र सहाय (आबूलेन) - उत्पाद में मैन्यूफैक्चरिंग व एक्सपायरी का कोई जिक्र नहीं