नदियों के किनारे महाआरती करने से उनका उद्धार नहीं होगा, बल्कि इसके लिए हमें नदियों से प्रेम करना होगा। हमारे अभिनेता विज्ञापनों में उत्पादों के गुण बताते हैं।
राज्यसभा सदस्य बनते हैं, लेकिन प्यूरीफायर का विज्ञापन करने वाला जल संरक्षण की बात नहीं करते। ये बातें मशहूर पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी ने इस्माईल कॉलेज में आयोजित गोष्ठी में कहीं।
कॉलेज में ‘गांधी जी एवं पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि प्रोफेसर एनके तनेजा कु लपति चौधरी चरण सिंह विवि रहे। मुख्य वक्ता प्रख्यात गांधीविद् प्रभात झा, अतिथि वक्ता पद्म श्री पर्यावरणविद डॉ. अनिल जोशी रहे।
डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि क्लाइमेंट चेंज पर इंटरनेशनल सेमिनार या चर्चाओं से कुछ नहीं होगा। संसद में बड़ी बातों पर चर्चा होती है मगर बगल में बहने वाली यमुना की सफाई पर किसी का ध्यान नहीं। जनता ने प्रकृति के उद्योग को हर लिया है।
पृथ्वी ने हमें बहुत कुछ दिया है, लेकिन हमने प्रकृति का उद्योग छीन लिया है। मोदी क ी पंच लाइन तंज कसते हुए कहा हमने सुना था कि अच्छे दिन आने वाले हैं, अच्छे दिन कब आएंगे पता नहीं, लेकिन बुरे दिन जरूर आ गए हैं।
प्राचार्या डॉ. इंदु शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। संयोजन डॉ. शिवाली अग्रवाल ने किया। संचालन गिरीश शुक्ला ने किया। डॉ. मंजूलता, डॉ. शगुफ्ता मौजूद रहीं।
तीन दिन में नहाते हैं डॉ. अनिल
डॉ. अनिल जोशी ने जेएनयू की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि विवि में वैचारिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने ऑड-ईवन को सही बताया।
जल संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन की तरह एक आग की जरूरत है। इसके अलावा जनता छोटे टिप्स अपनाकर भी जल, वायु संरक्षण कर सकती है।
पानी बचाने के लिए अनिल जोशी स्वयं तीन दिन में एक बार नहाते हैं। उन्होंने बताया विज्ञान के अनुसार 72 घंटे तक एक व्यक्ति के शरीर में कोई संक्रमण नहीं पनपता।
व्यक्ति व्यायाम कर ले तो संक्रमण के चांस घट जाते हैं। एक व्यक्ति पीने से अधिक जल नहाने पर खर्च करता है, इसलिए मैं तीन दिन में एक बार नहाता हूं।